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जानें किस दिन बंद होंगे केदारनाथ-बदरीनाथ नाथ धाम के कपाट; तिथियां हुई घोषित

Kedarnath Badrinath: बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने की तिथि घोषित हो गई है। 25 अक्तूबर को भगवान बदरीविशाल के कपाट शीतकाल के लिए बंद हो जाएंगे। Kedarnath Badrinath Closing: विजयदशमी के दिन उत्तराखंड के चारधामों में से एक, पवित्र बद्रीनाथ धाम के कपाट बंद होने की तिथि की घोषणा हो गई है। इसी के […]
Amritpal Singh
By : Updated On: 02 Oct 2025 14:58:PM
जानें किस दिन बंद होंगे केदारनाथ-बदरीनाथ नाथ धाम के कपाट; तिथियां हुई घोषित

Kedarnath Badrinath: बदरीनाथ धाम के कपाट बंद होने की तिथि घोषित हो गई है। 25 अक्तूबर को भगवान बदरीविशाल के कपाट शीतकाल के लिए बंद हो जाएंगे।

Kedarnath Badrinath Closing: विजयदशमी के दिन उत्तराखंड के चारधामों में से एक, पवित्र बद्रीनाथ धाम के कपाट बंद होने की तिथि की घोषणा हो गई है। इसी के साथ केदारनाथ धाम, द्वितीय केदार मद्महेश्वर जी और तृतीय केदार तुंगनाथ जी के भी कपाट बंद होने की तिथि की घोषणा हो गई है। 25 नवंबर को बदरीनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद होंगे। गंगोत्री धाम के कपाट 22 अक्टूबर और केदारनाथ व यमुनोत्री के कपाट 23 अक्टूबर को बंद होंगे।

उत्तराखंड के चारधामों में से एक, हर साल की तरह इस बार भी कपाट बंद होने की पारंपरिक प्रक्रिया विधि-विधान और श्रद्धा के साथ संपन्न की जाएगी। बद्रीनाथ धाम के कपाट इस साल 25 नवंबर (मंगलवार) को दोपहर 2 बजकर 56 मिनट पर शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। बद्रीनाथ धाम के साथ ही अन्य धामों के कपाट बंद होने की तिथियां भी घोषित की गई हैं। केदारनाथ धाम के कपाट 23 अक्टूबर 2025 को बंद किए जाएंगे।

इसके अलावा द्वितीय केदार श्री मद्महेश्वर जी के कपाट 18 नवंबर को ब्रह्म मुहूर्त में शीतकाल के लिए बंद होंगे। वहीं, तृतीय केदार तुंगनाथ जी के कपाट 6 नवंबर को बंद किए जाएंगे।

हर साल लाखों श्रद्धालु बद्रीनाथ-केदारनाथ यात्रा में शामिल होते हैं और कपाट बंद होने से पहले भगवान के दर्शन के लिए विशेष रूप से पहुंचते हैं। कपाट बंद होने के बाद देव प्रतिमाओं को शीतकालीन गद्दीस्थल पर ले जाया जाता है, जहां पूरे सर्दी के दौरान पूजा-अर्चना जारी रहती है।

गंगोत्री धाम के कपाट 22 अक्तूबर को बंद होंगे

गंगोत्री धाम के कपाट शीतकाल के लिए 22 अक्तूबर को अन्नकूट पर्व पर अभिजीत मूहूर्त में सुबह 11 बजकर 36 मिनट पर विधिविधान के साथ बंद होंगे। इसके बाद मां गंगा के दर्शन उनके शीतकालीन प्रवास मुखबा गांव में होंगे। उसके बाद मां गंगा की विग्रह डोली में भोग मूर्ति को आर्मी बैंड और स्थानीय वाद्य यंत्रों के साथ शीतकालीन प्रवास मुखबा गांव के लिए ले जाया जाएगा। 22 अक्टूबर की रात को मां गंगा की डोली मुखबा गांव से करीब 2 किमी की दूरी पर स्थित मार्कंडेय मंदिर में रात्रि विश्राम करेगी। उसके बाद अगले दिन 23 अक्टूबर को दोपहर में गंगा की विग्रह डोली मुखबा गांव पहुंचेगी।

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