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दंपति के बीच विवाद के कारण पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने जुड़वा बच्चियों की बात सुन सुनाया अहम फैसला

Punjab-Haryana High Court: गुरुग्राम में एक दंपति के बीच विवाद के कारण होईकोर्ट ने उनकी दोनों बच्चियों को बोर्डिंग स्कूल में भेजने का फैसला सुनाया है। Punjab-Haryana High Court: आज कल पति पत्नि के रिश्ते ज्यादा खराब होने लगे है इसकी वजह कुछ भी हो पर एक दंपति के बीच तनाव का सबसे अधिक असर […]
Khushi
By : Updated On: 04 Oct 2025 18:37:PM
दंपति के बीच विवाद के कारण पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने जुड़वा बच्चियों की बात सुन सुनाया अहम फैसला

Punjab-Haryana High Court: गुरुग्राम में एक दंपति के बीच विवाद के कारण होईकोर्ट ने उनकी दोनों बच्चियों को बोर्डिंग स्कूल में भेजने का फैसला सुनाया है।

Punjab-Haryana High Court: आज कल पति पत्नि के रिश्ते ज्यादा खराब होने लगे है इसकी वजह कुछ भी हो पर एक दंपति के बीच तनाव का सबसे अधिक असर अगर पड़ता है तो वो पड़ता है बच्चों पर। ऐसे में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने गुरुग्राम को एक दंपति के बीच विवाद के कारण उनकी जुड़वा बच्चियों को बोर्डिंग स्कूल भेजने का फैसला सुनाया है।

जस्टिस संजय वशिष्ठ ने बच्चियों से चैंबर में बातचीत करके उनकी स्थिति को समझने की कोशिश की। इसके बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि दोनों बच्चियों को गुरुग्राम के किसी बोर्डिंग स्कूल में भेजा जाए और बच्चियों का खर्च माता-पिता दोनों को उठाना पड़ेगा।

दंपति के बीच झगड़े का मामला

कोर्ट का कहना है कि बच्चियों ने कई बार अपने माता-पिता को झगड़ा और मारपीट करते हुए देखा है। उन्होंने बताया कि उनके पिता ऑफिस के काम में व्यस्त रहते हैं और देर से घर आते हैं, जबकि उनकी मां वर्क फ्रॉम होम में व्यस्त रहती हैं, जिसकी वजह से बच्चियां अकेलापन महसूस करती हैं।

जानकारी के मुताबिक, गुरुग्राम के एक दंपति के बीच झगड़े का मामला हाई कोर्ट में चल रहा है। इस मामले में सुनवाई के दौरान दंपति की दोनों जुड़वा बच्चियां भी मौजूद रहीं। बातचीत के वक्त बच्चियों ने माता-पिता के व्यवहार के बारे में बताया।

15 अक्टूबर को होगी सुनवाई

अदालत ने जिला प्रशासन और स्कूल प्रशासन को इस मामले में सहयोग देने का निर्देश दिया है। कोर्ट का कहना है कि दाखिला प्रक्रिया शुरू होने से पहले पिता की सहमति पर मां 2 दिन तक बच्चियों को अपने साथ रख सकती है। अदालत ने कहा है कि बच्चियों से मिलने के अधिकार को लेकर अलग से फैसला लिया जाएगा, इसकी अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी।

कोर्ट का यह भी कहना है कि बच्चों का हित सबस ऊपर है। माता-पिता के बीच चल रहे विवाद का असर मानसिक विकास पर नहीं पड़ना चाहिए। जस्टिस संजय वशिष्ठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि बच्चियों की मासूमियत और भावनात्मक स्थिरता को बनाए रखना अदालत के लिए सबसे पहले चिंता का विषय है।

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