आईपीएस सुसाइड केस, मुख्यमंत्री के निर्देश पर तुरंत हुई कार्रवाई, जाँच निष्पक्ष और पारदर्शी होगी” — शिक्षा मंत्री का बयान
Haryana IPS Suicide Case: पानीपत में शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने लगभग 1 महीने बाद भाजपा के जिला कार्यालय में जनता दरबार लगाकर लोगों की शिकायत सुनी ।जनता दरबार में बड़ी संख्या में लोग अपनी शिकायतें लेकर पहुंचे। अधिकारियों ने सभी शिकायतें सुनीं और सक्रिय रूप से समाधान की दिशा में काम किया। अधिकांश शिकायतें व्यक्तिगत मामलों से जुड़ी थीं, जबकि सामूहिक कार्यों पर पहले से ही काम चल रहा है। प्रतिनिधि ने कहा कि जिन कामों का वादा किया गया है, वे पूरे किए जाएंगे।
आईपीएस सुसाइड मामले में शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने कहा कि आईएएस अमनीत पी भी स्वयं एक अधिकारी रहे हैं, और अभी भी अधिकारी हैं।
अब कार्यवाही में जो समय लगता है, वह तो लगेगा ही। लेकिन एक बात स्पष्ट है — मुख्यमंत्री ने जो कहा है, उस पर तुरंत कार्रवाई हुई है। एफ.आई.आर. भी दर्ज हुई है।
सरकार ने जो कहा है, मुख्यमंत्री जी ने जो निर्देश दिए हैं, उन्हें मानना ही होगा — और जो उन्होंने कहा है जाँच पूरी तरह निष्पक्ष होगी।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि नायब सैनी की सरकार व
जब मनोहर लाल मुख्यमंत्री थे, तब भी हमने कभी पक्षपात की बात नहीं की।
मनोहर लाल ने इस राज्य में पहली बार निष्पक्षता से काम करने की परंपरा शुरू की थी, और उसी निष्पक्षता के कारण वे पूरे देश में जाने जाते हैं।
इसी परंपरा को अब नायब सैनी ने आगे बढ़ाया है।
तो मैं यह कहना चाहता हूँ कि जाँच का कार्य पुलिस विभाग का होता है।पुलिस विभाग में भी अलग-अलग विंग्स होती हैं।
जो भी शिकायतकर्ता है — चाहे कोई भी मामला हो, सिर्फ इसी नहीं — अगर उसे यह लगता है कि वह किसी जाँच से संतुष्ट नहीं है, तो उसके पास दूसरी विंग से जाँच कराने का भी विकल्प होता है।
लेकिन क्योंकि यह मामला विशेष रूप से मुख्यमंत्री के संज्ञान में है, और उन्होंने स्वयं कहा है कि जाँच निष्पक्ष होनी चाहिए, इसलिए निश्चिंत रहें — जाँच निष्पक्ष और पारदर्शी होगी।
हरियाणा के शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा ने कहा कि हमने एचएस, एचएसएससी और दोनों तरह के एचपीएससी को पत्र लिखा हुआ है। उस पर बातचीत चल रही है और बहुत जल्द उस दिशा में ठोस कार्रवाई होगी। हम सभी कामों पर पूरी गंभीरता से लगे हुए हैं।
इतनी कमी नहीं है, जितनी आपने बताई है। लगता है आपने यह आंकड़ा कहीं और से उठा लिया है।
फिलहाल हम यह भी देख रहे हैं कि किस स्कूल में कितने बच्चे हैं, कितने टीचर हैं, कितने होने चाहिए, और कहाँ कोई कमी तो नहीं है। बहुत जल्द हमारी यह लिस्ट तैयार हो जाएगी — काम जारी है।
मैंने विभाग को साफ़ निर्देश दिए हैं कि इस बार बिलकुल परफेक्ट लिस्ट बनाई जाए — ऐसी लिस्ट जिसमें कोई भी स्कूल ऐसा न बचे जहाँ टीचर न हों। खासतौर पर वे स्कूल जहाँ बच्चों की संख्या ज़्यादा है, वहाँ किसी भी विषय के टीचर की कमी नहीं रहनी चाहिए।
इन सभी बिंदुओं पर हमने काम शुरू कर दिया है। बीच में कुछ स्वास्थ्य कारणों से मैं खुद बैठकों में शामिल नहीं हो पाया था, लेकिन कल ही मैंने इस विषय पर अधिकारियों के साथ विस्तृत बैठक की है। और आने वाले दो दिनों में भी मैं इन्हीं मुद्दों पर अधिकारियों के साथ फिर से समीक्षा बैठक करने वाला हूँ।