दान हो तो ऐसा : एक मौत से सात लोगों को मिली जिंदगी -कुलपति डॉ एच के अग्रवाल

PGIMS Rohtak hospital; रोहतक हम किसी को यदि दान दे सकते हैं तो क्या ही दे सकते हैं, वास्तविक दान तो आज भिवानी जिले के 37 वर्षीय युवक के परिजनों ने उसके ब्रांडेड होने के बाद उसके अंगों के जरिए पांच लोगों को नई जिंदगी और दो लोगों के जीवन में रोशनी भरकर सबसे बड़ा […]
Jaspreet Singh
By : Updated On: 10 Apr 2026 21:26:PM
दान हो तो ऐसा : एक मौत से सात लोगों को मिली जिंदगी -कुलपति डॉ एच के अग्रवाल

PGIMS Rohtak hospital; रोहतक हम किसी को यदि दान दे सकते हैं तो क्या ही दे सकते हैं, वास्तविक दान तो आज भिवानी जिले के 37 वर्षीय युवक के परिजनों ने उसके ब्रांडेड होने के बाद उसके अंगों के जरिए पांच लोगों को नई जिंदगी और दो लोगों के जीवन में रोशनी भरकर सबसे बड़ा दान दिया है। युवक के परिवार के इस निर्णय ने ने केवल कई मरीजों को जीवन दान दिया अपितु समाज के सामने मानवता की एक प्रेरणादायक मिसाल भी पेश की। यह कहना है पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉक्टर एच के अग्रवाल का। वे गुरुवार को धनवंतरी एपेक्स ट्रॉमा सेंटर में युवक के परिजनों का इस महान कार्य के लिए धन्यवाद करने पहुंचे थे।

डॉ अग्रवाल ने बताया कि यह युवक 26 अप्रैल को पीजीआइएमएस में रेफर होकर आया था जहां पर सर्जरी विभाग के डॉ ए आर बंसल की यूनिट द्वारा उन्हें ट्रॉमा सेंटर आईसीयू में भर्ती किया गया। यहां पर निषेचन विभागाध्यक्ष डॉ एस के सिंघल के दिशा निर्देशन में डॉ तरुण और उनकी टीम ने मरीज का इलाज प्रारंभ किया। डॉ तरुण ने 7 अप्रैल को पाया कि यह मरीज संभावित ब्रेन डेड लग रहा है तो ऐसे में उन्होंने चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर कुंदन के पास सूचना भेजी। चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर कुंदन मित्तल ने तुरंत प्रभाव से डॉक्टर ए आर बंसल, डॉक्टर तरुण और न्यूरो सर्जरी विभाग से डॉ की टीम गठित करी। जिस पर टीम ने पहले टेस्ट में मरीज को ब्रेन डेड पाया और 12 घंटे बाद भी जब दोबारा मरीज का टेस्ट किया गया तो उसमें भी मरीज ब्रेन डेड पाया गया। कुलपति डॉ अग्रवाल ने बताया कि इसके पश्चात स्टेट ऑर्गन एंड टिशु ट्रांसप्लांट आर्गेनाइजेशन के नोडल अधिकारी डॉ सुखबीर, ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेटर दीप्ति, रोहित ,डॉ तरुण जब परिवार जनों को युवक के ब्रेन डेड होने की स्थिति के बारे में जानकारी दी और उन्हें ऐसी स्थिति में अंगदान जैसे महादान के बारे में अवगत करवाया तो युवक के पिता ने और अन्य परिजनों ने अंगदान के लिए तुरंत हामी भर दी।

डॉ अग्रवाल ने बताया कि पीजीआईएमएस के इतिहास में हालांकि पहले दो अंगदान हो चुके हैं लेकिन यह पहला अंगदान है जिसमें अंक डाटा के सभी अंग दान किए गए हैं। डॉ अग्रवाल ने बताया कि युवक के परिजनों ने लोगों को बचाने के लिए युवक के लंग्स, ह्रदय ,किडनी लिवर, कॉर्निया दान किए हैं।

कुलपति डॉ अग्रवाल ने युवक के परिजनों का तहे दिल से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने अपने बेटे का अंगदान करवा कर प्रदेश में अंगदान के प्रति एक अलख जगा दी है, जिससे उन्हें पूरी उम्मीद है कि अब प्रदेश में इससे काफी जागरुकता बढ़ेगी। डॉ अग्रवाल ने बताया कि युवक के परिजनों द्वारा उठाए गए इस प्रेरणादायक कार्य के लिए पीजीआई के 21 सुरक्षा कर्मचारियों द्वारा सलामी प्रदान की गई वहीं ऑपरेशन थिएटर से एंबुलेंस तक नर्सिंग कॉलेज के विद्यार्थियों, कर्मचारियों ने लाइन में खड़े होकर फूल बरसाए और युवक को श्रद्धांजलि अर्पित की।

युवक के हृदय, लीवर और लंग्स को नोटो चंडीगढ़ द्वारा दिल्ली के विभिन्न अस्पतालों को अलॉट किया गया था जहां से तीनों अस्पतालों की टीम ने आकर अंगों को निकाला और अपने साथ ले जाकर मरीज को लगाकर उन्हें नया जीवन दान दिया। डॉ सिंघल ने बताया कि युवक की दोनों किडनी और कॉर्निया पीजीआई रोहतक को आलोट हुए थे जो यहां के मरीजों को लगाए गए। डॉ एस के सिंघल ने कहा कि प्रदेश में सोटो द्वारा अंगदान के प्रति चलाई जा रही मुहिम से अंगदान के प्रति लोगों में काफी जागरुकता बढ़ी है किडनी के लिए एचएलए टेस्ट करवाना जरूरी होता है, जिसके लिए परिजनों की सहमति मिलते ही गढ़ दिवस रात्रि ही यह टेस्ट दिल्ली से करवाया गया। डॉ कुंदन मित्तल ने कहा कि कोई भी अंगदान के इच्छुक व्यक्ति चिकित्सा अधीक्षक स्थित सोटो के 17 नंबर कार्यालय से संपर्क कर सकता है।

रोहतक पुलिस ने एक दिन में तीन बार ग्रीन कॉरिडोर बनाकर रचा इतिहास

पंडित भगवत दयाल शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति डॉक्टर एच के अग्रवाल ने हरियाणा पुलिस का धन्यवाद व्यक्त करते हुए कहा कि रोहतक पुलिस के कप्तान गौरव राज पुरोहित की टीम में शामिल 100 से अधिक पुलिस कर्मचारियों ने समय पर अस्पतालों में ऑर्गन पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। डाॅ. अग्रवाल ने कहा कि प्रदेश के इतिहास में पहली बार एक दिन में तीन बार ग्रीन कोरिडोर बनाने में एक एडिशनल एसपी आयुष यादव, 2 ट्रैफिक एसएचओ जसबीर, प्रवीण सहित 4 ज्यूडिशियरी एसएचओ ने जैसे ही अंग दिल्ली के लिए निकले पूरे शहर के रास्ते को ब्लाॅक करके पूरी स्पीड से अंग रोहतक से दिल्ली के लिए निकलवाने में अहम भूमिका अदा करवाई। जो पूरे प्रदेश के इतिहास में अपने आप में हरियाणा पुलिस के लिए गौरव का विषय है।

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