नालागढ़ के आशीर्वाद अस्पताल में डिलीवरी के दौरान महिला की मौत, परिजनों ने डॉक्टर पर लगाए लापरवाही के आरोप
दीप कौर की सर्जरी के बाद सुबह बढ़ा दर्द, इंजेक्शन के 10 मिनट बाद तोड़ा दम, पुलिस ने दर्ज किया केस, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार
नालागढ़ के न्यू नालागढ़ कॉलोनी में स्थित आशीर्वाद अस्पताल में एक महिला की डिलीवरी के दौरान मौत का मामला सामने आया है, जिसने परिवार और स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है। दीप कौर नामक महिला के परिजनों ने अस्पताल के डॉक्टर पंकज शर्मा पर लापरवाही का गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि सर्जरी के बाद सुबह दर्द होने पर दिए गए इंजेक्शन के मात्र 10-15 मिनट बाद उनकी मौत हो गई। पुलिस ने परिजनों की शिकायत पर अस्पताल प्रशासन के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है, और महिला के शव को पोस्टमार्टम के लिए शिमला के IGMC अस्पताल रेफर कर दिया गया है। जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
मृतक महिला के पति विक्रम सिंह ने बताया, “हमारे दो बेटियां हैं, और तीसरी डिलीवरी के लिए हमने डॉक्टर की सलाह पर गुरुवार शाम को अस्पताल में भर्ती किया। सर्जरी से बेटा पैदा हुआ, रात ठीक रही, लेकिन सुबह 5 बजे दर्द शुरू हुआ। डॉक्टर ने इंजेक्शन दिया, लेकिन हालत बिगड़ गई। और उसकी मौत तो आशीर्वाद अस्पताल में ही हो गई थी लेकिन अस्पताल ने सरकारी अस्पताल रेफर किया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।” विक्रम ने आरोप लगाया कि समय पर रेफर न करने और लापरवाही से उनकी पत्नी की जान गई। उन्होंने डॉक्टर का लाइसेंस रद्द करने और सख्त सजा की मांग की है।
मृतक महिला के भाई सुखविंदर सिंह ने कहा, “डॉक्टर ने दर्द को सामान्य बताया और इंजेक्शन दिया, लेकिन हालत बिगड़ी तो चंडीगढ़ रेफर करने की बात कही। अस्पताल ने न तो एंबुलेंस दी और न ही तुरंत टेस्ट किए। निजी अस्पताल महंगे इलाज के नाम पर लूटते हैं, लेकिन जान बचाने में लापरवाही करते हैं।” सुखविंदर ने पुलिस के उच्च अधिकारियों से डॉक्टर पंकज के खिलाफ कार्रवाई और लाइसेंस रद्द करने की गुहार लगाई। और उन्होंने कहा कि आशीर्वाद अस्पताल के डॉक्टर पंकज शर्मा की लापरवाही के कारण उनकी बहन की मौत हुई है उनके ऊपर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए ताकि आगे से किसी के साथ ऐसा ना हो सके।
डीएसपी नालागढ़ भीष्म ठाकुर ने बताया, “परिजनों की शिकायत पर अस्पताल के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर जांच आगे बढ़ेगी। हम इस मामले को गंभीरता से ले रहे हैं। डॉक्टर पंकज शर्मा ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा, “डिलीवरी के दौरान 5-7 हजार केसों में से 1 केस में ऐसा होता है, जहां ब्लड फेफड़ों में चला जाता है। हमने रात को ही रेफर करने की सलाह दी थी, लेकिन परिजनों ने सुबह तक इंतजार किया।” उन्होंने दावा किया कि सभी प्रक्रियाएं सही की गईं।
यह घटना नालागढ़ में निजी अस्पतालों की सेवाओं पर सवाल उठाती है। स्थानीय लोग और सामाजिक कार्यकर्ता डॉक्टरों की लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। “महिलाओं की डिलीवरी में लापरवाही अस्वीकार्य है। सरकार को निजी अस्पतालों की निगरानी बढ़ानी चाहिए।” परिवार ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है, और जांच के बाद आगे की कार्रवाई होगी। यह मामला स्वास्थ्य सेवाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही की जरूरत को रेखांकित करता है।