नसीआर में ज़हर बनती हवा, भाजपा सरकारों की विफलता उजागर: कुमारी सैलजा

चंडीगढ़, 19 जनवरी। दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 700 से ऊपर खतरनाक स्तर पर पहुंचना केवल पर्यावरणीय संकट नहीं, बल्कि केंद्र और राज्यों की सरकारों की प्राथमिकताओं की गंभीर विफलता का प्रमाण है। इस समय न तो पराली जलाई जा रही है और न ही दीपावली जैसे त्यौहार हैं, फिर भी दिल्ली और एनसीआर […]
Khushi
By : Updated On: 19 Jan 2026 14:57:PM
नसीआर में ज़हर बनती हवा, भाजपा सरकारों की विफलता उजागर: कुमारी सैलजा

चंडीगढ़, 19 जनवरी। दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 700 से ऊपर खतरनाक स्तर पर पहुंचना केवल पर्यावरणीय संकट नहीं, बल्कि केंद्र और राज्यों की सरकारों की प्राथमिकताओं की गंभीर विफलता का प्रमाण है। इस समय न तो पराली जलाई जा रही है और न ही दीपावली जैसे त्यौहार हैं, फिर भी दिल्ली और एनसीआर की हवा ज़हर बन चुकी है। यह सवाल स्वाभाविक है कि आखिर इसकी जि़म्मेदारी कौन लेगा।

यह बात सिरसा की सांसद, पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव कुमारी सैलजा ने आज मीडिया को जारी एक बयान में कही। उन्होंने इन हालातों के लिए सरकार की नीतियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जब केंद्र सरकार, दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान सभी जगह भारतीय जनता पार्टी की सरकारें हैं, तब एक-दूसरे पर आरोप लगाने का बहाना भी अब नहीं बचता।

वर्षों तक कभी पंजाब तो कभी हरियाणा के किसानों को दोष देने वाली भाजपा आज जनता को यह बताए कि मौजूदा हालात के लिए उसकी क्या जवाबदेही है। कुमारी सैलजा ने कहा कि 11 वर्ष पूर्व गंगा-यमुना को स्वच्छ करने के बड़े-बड़े दावे किए गए थे। आज सरकार यह स्पष्ट करे कि क्या वास्तव में गंगा और यमुना स्वच्छ हो गई हैं, या ये घोषणाएं केवल प्रचार तक सीमित रहीं।

उन्होंने हरियाणा की जीवन रेखा कही जाने वाली घग्गर नदी का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सरकार की अपनी रिपोर्ट बताती है कि घग्गर का पानी अब फसलों के लिए भी उपयुक्त नहीं रह गया है। नदी के किनारे बसे गांवों में कैंसर जैसी घातक बीमारियों का फैलना बेहद चिंताजनक है। यह केवल पर्यावरण का नहीं, बल्कि सीधे-सीधे जनस्वास्थ्य और जीवन के अधिकार का प्रश्न है।

कुमारी सैलजा ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि सरकार इन जानलेवा मुद्दों पर गंभीरता से काम करने के बजाय धर्म और भावनात्मक मुद्दों के नाम पर राजनीति चमकाने में लगी हुई है। जनता को भाषण नहीं, बल्कि स्वच्छ हवा, स्वच्छ पानी और बुनियादी सुविधाएं चाहिए। उन्होंने मांग की कि केंद्र और राज्य सरकारें तत्काल ठोस कार्ययोजना प्रस्तुत करें, प्रदूषण के वास्तविक कारणों पर वैज्ञानिक और ईमानदार कार्रवाई करें और नागरिकों को यह भरोसा दें कि उनकी सांसें और उनका स्वास्थ्य राजनीति की भेंट नहीं चढ़ेंगे।

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