आंध्र प्रदेश में एक मुठभेड़, एक करोड़ का इनामी माओवादी हिडमा ढेर, एनकाउंटर में 5 साथी भी मारे गए
Andhra Pradesh Encounter: सुरक्षाबलों को नक्सलवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में बड़ी कामयाबी मिली है। देश के सबसे ख़तरनाक नक्सलियों में गिने जाने वाले माड़वी हिड़मा को सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में मार गिराया है।
Andhra Pradesh Naxlite Encounter: छत्तीसगढ़ में सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी मिली है। आंध्र प्रदेश सीमा पर भीषण मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने 6 नक्सलियों को ढेर कर दिया है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, मुठभेड़ में खूंखार नक्सली कमांडर हिडमा और पत्नी राजे भी ढेर हो गई है। हालांकि, अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस ने बताया कि एर्राबोर थाना क्षेत्र के जंगल में नक्सलियों और सुरक्षा बलों के बीच रुक-रुक कर गोलीबारी जारी है।
माओवादियों की मौजूदगी की सूचना मिलने के बाद सुरक्षा बलों ने तलाशी अभियान शुरू किया। हिडमा उर्फ संतोष अपनी पत्नी और अन्य साथियों के साथ छत्तीसगढ़ से भाग रहा था। अधिकारियों ने बताया कि सुबह करीब 6 से 7 बजे के बीच आंध्र प्रदेश के अल्लूरी सीताराम राजू जिले के मारेडुमल्ली जंगल में सुरक्षा बलों ने हिडमा और उसके साथियों को घेर लिया और मुठभेड़ में मार गिराया।
आंध्र प्रदेश की सीमा से लगे जंगलों में माओवादियों की बढ़ती गतिविधियों की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने तलाशी अभियान चलाया। इसके बाद माओवादियों ने गोलीबारी शुरू कर दी, जिसके बाद पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई की। बताया जा रहा है कि इस मुठभेड़ में हिडमा और हेमा के साथ ही उन्हें सुरक्षा प्रदान कर रहे चार अन्य माओवादी भी मारे गए।
हथियारों का जखीरा भी बरामद
अधिकारी ने बताया कि मुठभेड़ स्थल से .303 राइफल, बैरल ग्रेनेड लॉन्चर (बीजीएल), अन्य हथियार एवं विस्फोटक भी बरामद किए गए। चव्हाण ने बताया कि मारे गए नक्सलियों की पहचान एरिया कमेटी सदस्य मादवी देवा, सीएनएम (चेतना नाट्य मंडली- माओवादियों का एक सांस्कृतिक संगठन) कमांडर पोडियाम गंगी और किस्टाराम एरिया कमेटी सदस्य सोढ़ी गंगी के रूप में हुई है, दोनों महिलाएं थीं और प्रत्येक पर पांच लाख रुपये का इनाम था। अधिकारी ने बताया कि देवा, एक स्नाइपर विशेषज्ञ और माओवादियों की कोंटा एरिया कमेटी का एक खूंखार सदस्य था और कई निर्दोष नागरिकों की हत्या में शामिल था।
कौन था माड़वी हिड़मा
हिड़मा का जन्म 1981 में छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में हुआ था। शुरुआत में वह पीपुल्स लिब्रेशन गुरिल्ला बटालियन का लीडर बना। बाद में वह सीपीआई-माओवादी की केंद्रीय कमेटी का सदस्य बना। बस्तर क्षेत्र से वह इकलौता सदस्य था जो केंद्रीय कमेटी तक पहुंचा।
बड़ा नाम कैसे बना?
-उसका नाम पहली बार झीरम घाटी हमले के बाद सामने आया।
-इसके बाद उसने कई बड़े नक्सली हमलों की योजना बनाई।
-दशकों तक पूरे बस्तर क्षेत्र में उसका नाम खौफ से लिया जाता था।