धनतेरस 2025: आरोग्य के देवता भगवान धन्वंतरि की पूजा विधि, मंत्र, आरती और शुभ मुहूर्त जानें

Dhanteras 2025: दिवाली का त्यौहार धनतेरस से शुरू होता है और इस दिन भगवान धन्वंतरि की विशेष पूजा का विशेष महत्व है। हिंदू धर्म में भगवान धन्वंतरि को स्वास्थ्य और आयुर्वेद का देवता माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को भगवान धन्वंतरि समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर […]
Khushi
By : Updated On: 18 Oct 2025 10:45:AM
धनतेरस 2025: आरोग्य के देवता भगवान धन्वंतरि की पूजा विधि, मंत्र, आरती और शुभ मुहूर्त जानें

Dhanteras 2025: दिवाली का त्यौहार धनतेरस से शुरू होता है और इस दिन भगवान धन्वंतरि की विशेष पूजा का विशेष महत्व है। हिंदू धर्म में भगवान धन्वंतरि को स्वास्थ्य और आयुर्वेद का देवता माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को भगवान धन्वंतरि समुद्र मंथन से अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे। इसलिए इस दिन देवी लक्ष्मी के साथ भगवान धन्वंतरि की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

इस वर्ष धनतेरस 2025 18 अक्टूबर को मनाया जाएगा और पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 7:16 बजे से रात 8:20 बजे तक रहेगा।

भगवान धन्वंतरि की पूजा विधि

  • सबसे पहले एक साफ लकड़ी के पाट पर पीला या लाल कपड़ा बिछाएँ।
  • उस पर भगवान धन्वंतरि की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। साथ ही देवी लक्ष्मी और कुबेर देव की मूर्तियाँ भी रखें।
  • घी का दीपक जलाएँ और भगवान को तिलक लगाएँ।
  • पुष्प, धूप और नैवेद्य अर्पित करें।

पूजा करते समय इस मंत्र का जाप करें:
“ॐ नमो भगवते धन्वंतरि विष्णुरूपाय नमो नमः”

अंत में, भगवान धन्वंतरि की आरती करें और उन्हें भोग लगाएँ।

पूजा के दौरान अच्छे स्वास्थ्य और खुशहाली की प्रार्थना करें।

धन्वंतरि भगवान पूजा मंत्र

ॐ नमो भगवते महासुदर्शनाय वासुदेवाय धन्वंतरयेः
अमृतकलश हस्ताय सर्व भयविनाशाय सर्व रोगनिवारणाय
त्रिलोकपथाय त्रिलोकनाथाय श्री महाविष्णुस्वरूप
श्री धनवंतरी स्वरूप श्री श्री श्री औषधचक्र नारायणाय नमः॥

धन्वंतरि भगवान की आरती

ॐ जय धन्वंतरि देवा, स्वामी जय धन्वंतरि जी देवा।
जरा-रोग से पीड़ित, जन-जन सुख देवा।।

तुम समुद्र से निकले, अमृत कलश लिए।
देवासुर के संकट, आकर दूर किए।।

आयुर्वेद बनाया, जग में फैलाया।
सदा स्वस्थ रहने का, साधन बतलाया।।

भुजा चार अति सुंदर, शंख सुधा धारी।
आयुर्वेद वनस्पति से, शोभा भारी।।

तुम को जो नित ध्यावे, रोग नहीं आवे।
असाध्य रोग भी उसका, निश्चय मिट जावे।।

हाथ जोड़कर प्रभुजी, दास खड़ा तेरा।
वैद्य-समाज तुम्हारे, चरणों का घेरा।।

धन्वंतरिजी की आरती, जो कोई नर गावे।
रोग-शोक न आए, सुख-समृद्धि पावे।।

विशेष मान्यता

धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि की पूजा करने से रोगों से मुक्ति मिलती है और परिवार में आरोग्यता बनी रहती है। आयुर्वेद से जुड़े लोग विशेष रूप से इस दिन भगवान धन्वंतरि का पूजन करते हैं। यह दिन चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए भी अत्यंत खास होता है।

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