नई पॉलिसी के चलते H-1B वीजा धारकों को करना पड़ रहा मुश्किलों का सामना, ट्रंप प्रशासन से अपील H-1B वीजा मत दो
Indian Americans Controversy: अमेरिका में रह रहे भारतीयों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। ट्रंप प्रशासन के दौर में भारतीयों के लिए यह बड़ा झटका माना जा रहा है। उन्हें बाहर करने की मांग उठ रही है। वहीं, कुछ लोग बचाव भी कर रहे हैं।
America H-1B Visa Policy: अमेरिका में H-1B वीजा को लेकर अब अमेरिकी लोगों का ही विरोध देखने को मिल रहा है। एक अमेरिकी व्यक्ति ने H-1B वीजा नीति की आलोचना की है। वीजा नीति के तहत वीजा धारकों को अमेरिका में बने रहने के लिए वीजा समाप्ति के 60 दिनों के भीतर रोजगार ढूंढना अनिवार्य है।
H-1B वीजा नीति की आलोचना करने वाले शख्स का नाम नाथन प्लैटर है। नाथन प्लैटर ने अपनी एक दोस्त का उदाहरण दिया, जिसे निर्धारित 2 महीनों के भीतर नई नौकरी ना मिलने के कारण अमेरिका छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा।
भारतीय-अमेरिकी समुदाय 2023 में बढ़कर 50 लाख के पार हो गई। कई बाधाओं को पार करते हुए अब अमेरिका में सबसे प्रभावशाली आप्रवासी समूहों में से एक बन गया है, 2024 में आई एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया था। उस रिपोर्ट में डायास्पोरा के संस्थापक एमआर रंगास्वामी ने बताया था कि भारतीय अमेरिकी पूरी अमेरिकी आबादी का केवल 1.5 प्रतिशत हैं, फिर भी अमेरिकी समाज के कई पहलुओं पर उनका व्यापक और सकारात्मक प्रभाव जारी है।
LinkedIn पर उस H-1B नीति की आलोचना
मगर, सोशल मीडिया पर ही कुछ अमेरिकी यह कह रहे हैं कि भारतीयों को अब और वीजा न दिया जाए। वैसे भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आए दिन नए नियमों ने पहले ही अमेरिका जाने का सपना देखने वाले भारतीयों की कमर तोड़कर रख दी है। ट्रंप प्रशासन ने H1-B वीजा और ग्रीन कार्ड से जुड़े नियमों को लेकर नियम काफी सख्त कर दिए हैं।
नाथन प्लैटर ने सोशल मीडिया मंच LinkedIn पर उस H-1B नीति की आलोचना की है जिसके कारण उनकी दोस्त को स्थानांतरित होना पड़ा। उन्होंने बताया कि उसने अमेरिका में काम करके और टैक्स देकर अपनी जिंदगी बनाई थी। प्लैटर ने कहा, “हमने उसे यहां पढ़ने दिया। यहां काम करने दिया। यहां टैक्स भरने दिया और अब हम उसे बाहर निकाल रहे हैं? मेरी दोस्त अमेरिका में 8 साल (4 स्नातक + 2 स्नातकोत्तर + 2 नौकरी) बिताने के बाद भारत वापस जा रही है क्योंकि उसे H-1B वीजा धारकों के लिए निर्धारित 60 दिन की छूट अवधि में नई नौकरी नहीं मिल पाई।”
‘यह नीति हास्यास्पद है’
प्लैटर ने कहा कि उनकी दोस्त ने 14 घंटे काम किया और अपनी टीम को आगे बढ़ाया। इसके बावजूद, उसे ऑस्टिन, टेक्सास में अपना जीवन छोड़कर अपने देश लौटने के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने कहा, “उसे ऑस्टिन में अपनी जिंदगी को उखाड़ फेंकना होगा, अपने समुदाय को अलविदा कहना होगा, यह नीति हास्यास्पद है।”
प्लैटर ने की कही बदलाव की बात
प्लैटर ने कहा कि अमेरिका अपनी 60 दिवसीय ग्रेस पीरियड नीति के जरिए प्रतिभाशाली लोगों को प्रशिक्षित और शिक्षित कर रहा है और उन्हें वैश्विक प्रतिस्पर्धियों को सौंप रहा है। उन्होंने H-1B प्रणाली में बदलाव का आह्वान करते हुए कहा, “हमें अंतरराष्ट्रीय प्रतिभाओं को बनाए रखने के बेहतर तरीकों की जरूरत है।”