एमएसपी पर खरीद में देरी से किसानों की बढ़ती परेशानी: कुमारी सैलजा

चंडीगढ़– सिरसा की सांसद, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव ने हरियाणा में एमएसपी पर गेहूं की सरकारी खरीद की मौजूदा स्थिति पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा है कि खरीद में देरी और अव्यवस्था के कारण किसानों की परेशानियां लगातार बढ़ रही हैं और तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की आवश्यकता […]
Amritpal Singh
By : Updated On: 10 Apr 2026 13:34:PM
एमएसपी पर खरीद में देरी से किसानों की बढ़ती परेशानी: कुमारी सैलजा

चंडीगढ़– सिरसा की सांसद, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव ने हरियाणा में एमएसपी पर गेहूं की सरकारी खरीद की मौजूदा स्थिति पर गंभीर चिंता जताते हुए कहा है कि खरीद में देरी और अव्यवस्था के कारण किसानों की परेशानियां लगातार बढ़ रही हैं और तत्काल सुधारात्मक कदम उठाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि बेमौसम बारिश, तेज आंधी और ओलावृष्टि के कारण प्रदेश के बड़े हिस्से में खड़ी फसल को भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे किसानों की आय पर सीधा असर पड़ा है। इसके साथ ही मंडियों में खरीद प्रक्रिया में देरी और अव्यवस्था ने किसानों की मुश्किलों को और बढ़ा दिया है।

उन्होंने बताया कि सरकारी घोषणाओं के बावजूद जमीनी स्तर पर खरीद व्यवस्था अभी तक पूरी तरह सुचारु नहीं हो पाई है। मंडियों में अपनी फसल लेकर पहुंच रहे किसानों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है, जहां उन्हें व्यवस्थागत कमियों, लॉजिस्टिक समस्याओं और अपर्याप्त इंतजामों का सामना करना पड़ रहा है। खराब मौसम के चलते मंडियों में पड़ा गेहूं भी नुकसान की आशंका में है, जिससे किसानों की चिंता और बढ़ गई है। किसानों पर आर्थिक बोझ भी तेजी से बढ़ रहा है। परिवहन, मजदूरी और फसल के प्रबंधन पर अतिरिक्त खर्च उनकी स्थिति को और कमजोर कर रहा है। वहीं खरीद और भुगतान में देरी के कारण उनकी आर्थिक हालत बिगड़ रही है और कर्ज पर निर्भरता बढ़ती जा रही है। उन्होंने मुआवजे और फसल बीमा को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि नुकसान के आकलन और मुआवजे के वितरण की प्रक्रिया धीमी है, जिससे पारदर्शिता और क्रियान्वयन पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इस कारण किसानों में असंतोष बढ़ रहा है।

कुमारी सैलजा ने सरकार से मांग की कि एमएसपी पर समयबद्ध और सुचारु खरीद सुनिश्चित की जाए, मंडियों में बुनियादी सुविधाएं मजबूत की जाएं और फसल नुकसान का तुरंत सर्वे कर उचित मुआवजा दिया जाए। साथ ही फसल बीमा दावों का निपटारा भी तय समय सीमा में किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसानों के हितों की रक्षा और उनकी उपज का उचित मूल्य सुनिश्चित करना सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। राज्य सरकार को केवल घोषणाओं तक सीमित रहने के बजाय जमीनी स्तर पर प्रभावी कदम उठाने होंगे।

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