सरकार की धीमी मुआवजा प्रक्रिया ने बढ़ाई किसानों की पीड़ा: सैलजा
चंडीगढ़ : सिरसा से सांसद, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव कुमारी सैलजा ने हरियाणा में किसानों की वर्तमान स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि प्रदेश का किसान इस समय अभूतपूर्व संकट से गुजर रहा है। हाल के दिनों में कैथल, सिरसा, जींद, झज्जर और रोहतक सहित कई जिलों में प्राकृतिक आपदाओं (ओलावृष्टि, आगजनी व बारिश) ने सैकड़ों एकड़ गेहूं की फसल को बर्बाद कर दिया है। यह केवल फसल का नुकसान नहीं, बल्कि किसानों की महीनों की मेहनत और उम्मीदों का टूटना है।
उन्होंने कहा कि इन घटनाओं के बाद भी सरकार की ओर से राहत और मुआवजे की प्रक्रिया बेहद धीमी और निराशाजनक है, जिससे प्रभावित किसानों की पीड़ा और बढ़ गई है। इसके साथ ही सरकारी खरीद व्यवस्था की खामियों ने किसानों को और अधिक संकट में डाल दिया है। 1 अप्रैल से खरीद शुरू होने के दावों के बावजूद मंडियों में अव्यवस्था का आलम है। किसान अपनी उपज खुले में रखने को मजबूर हैं, जहां नमी और मौसम की मार से फसल खराब हो रही है।
कुमारी सैलजा ने कहा कि मंडियों में आवश्यक व्यवस्थाओं का अभाव, उठान में देरी, जूट बैग की कमी और प्लास्टिक बैग का बढ़ता उपयोग, साथ ही नमी और डिजिटल प्रक्रियाओं के नाम पर बार-बार बाधाएं खड़ी करना, यह सब किसानों के साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि सरकार की यह लापरवाही और संवेदनहीनता किसानों को आर्थिक और मानसिक रूप से तोड़ रही है और उन्हें औने-पौने दामों पर फसल बेचने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
कुमारी सैलजा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी किसानों के साथ खड़ी है और उनकी समस्याओं को मजबूती से उठाती रहेगी। उन्होंने सरकार से मांग की कि प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसानों को शीघ्र और पर्याप्त मुआवजा दिया जाए तथा मंडियों में खरीद, भंडारण और उठान की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए ताकि किसानों को और नुकसान न उठाना पड़े।
दो दिन संसदीय क्षेत्र में रहेंगी कुमारी सैलजा
सांसद कुमारी सैलजा दो दिन सिरसा संसदीय क्षेत्र में कई कार्यक्रमों में भाग लेंगी। 14 अप्रैल को कुमारी सैलजा सिरसा में विभिन्न कार्यक्रमों में भाग लेंगी, जिनमें बाबा साहेब डॉ. भीम राव अंबेडकर जी की जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम भी शामिल है।
15 अप्रैल को वे फतेहाबाद में जिला विकास समन्वय एवं निगरानी समिति (दिशा) की बैठक में भाग लेंगी तथा इसके पश्चात नरवाना (जींद) में अनाज मंडी पहुंचकर किसानों की कठिनाइयों को सुनेंगी।