अलर्ट! भयंकर शीतलहर और कड़ाके की ठंड पड़ेगी, एक्टिव होगा ‘ला नीना’, मौसम विभाग का अलर्ट
Cold Wave In India: कुछ ही महीनों सर्दियां आने वाली हैं। ऐसे में मौसम विभाग ने लोगों को ला नीना इफेक्ट को लेकर अलर्ट जारी कर दिया है। इसके मुताबिक इस साल अधिक सर्दी पड़ सकती है।
La Nina Update, IMD Alert on Cold Weather: भारत में इस साल अब तक मानसून सीजन में सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज की गई। मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि साल के आखिर में ला नीना की स्थिति वापस आ सकती है, जिससे देश में कड़ाके की सर्दी पड़ सकती है। अमेरिका के जलवायु केंद्र के अनुसार, अक्टूबर-दिसंबर में ला नीना आने की 71 प्रतिशत संभावना है। इससे उत्तर भारत में ज्यादा सर्दी और हिमालयी क्षेत्रों में भारी बर्फबारी हो सकती है।
अमेरिका की नेशनल वेदर सर्विस के क्लाइमेट प्रिडिक्शन सेंटर ने 11 सितंबर 2025 को बताया कि अक्टूबर- दिसंबर 2025 के बीच 71 प्रतिशत तक ला नीना के डेवलप होने की संभावना है, हालांकि दिसंबर-फरवरी तक इसकी संभावना घटकर 54 प्रतिशत तक रह जाती है, लेकिन यह अभी भी प्रभावी है। इस बार भारत में ज्यादा गर्मी नहीं पड़ी और न ही साल 2025 सबसे गर्म साल कहलाएगा, क्योंकि इस बार मानसून सीजन में सामान्य से ज्यादा बारिश हुई है। मौसम विज्ञानियों का कहना है कि इस साल के अंत में प्रशांत महासागर में ला नीना एक्टिव होने से भारत समेत पूरी दुनिया में मौसम पर असर पड़ेगा।

उत्तर भारत के लोग सतर्क रहें
मौसम विज्ञानियों का कहना है कि ला नीना के असर से भारत की सर्दियां खासकर अक्टूबर से दिसंबर के बीच सामान्य से ज्यादा ठंडी हो सकती हैं। उत्तर भारत और हिमालयन रीजन में भयंकर शीतलहर, कड़ाके की ठंड और भारी बर्फबारी का दौर रहेगा। इसलिए पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, उत्तर प्रदेश, बिहार समेत उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश के लोगों को सतर्क रहने की जरूरत हैं. बर्फबारी के लिए पहले से तैयार की जरूरत है।
क्या है ला नीना की स्थिति?
बता दें कि ला नीना अल नीनो साउदर्न ओसिलेशन (ENSO) नामक जलवायु परिवर्तन है, जिससे प्रशांत महासागर ठंडा हो जाता है। इसका तापमान सामान्य से कम हो जाता है. पूर्वी हवाएं तेजी से बहती हैं। इससे जहां धरती के कुछ हिस्सों में ज्यादा बारिश होती है, वहीं कुछ इलाकों को सूखे की स्थिति झेलनी पड़ती है। जिस समय ला-नीना एक्टिव होता है और इसके असर से जिन हिस्सों में बारिश होती है, उस समय भारत में सर्दी भी पड़ती है।

पहाड़ी राज्यों में हो सकती है भारी बर्फबारी
जीपी शर्मा ने बताया कि प्रशांत महासागर में जारी ठंडक वैश्विक मौसम को प्रभावित कर सकती है। अगर ला नीना आता है तो अमेरिका पहले से ही सूखी सर्दियों (ड्राई विंटर) के लिए अलर्ट पर है। जबकि भारत में इसका असर खासतौर पर उत्तर भारत और हिमालयी इलाकों में पड़ेगा। ये कड़ाके की ठंड और पहाड़ी राज्यों में भारी बर्फबारी ला सकता है।
भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (IISER), मोहाली और ब्राज़ील के राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान की एक स्टडी में पता चला कि 2024 में ला नीना ने उत्तर भारत में तेज शीत लहरें लाने में अहम भूमिका निभाई। स्टडी के अनुसार, ला नीना के समय निचले स्तर की हवाओं में बदलाव ठंडी हवा को ऊपरी इलाकों से भारत की ओर लाता है। इसी कारण शीत लहरें और उनकी अवधि, एल नीनो और सामान्य सालों की तुलना में, ला नीना वाले सालों में ज्यादा होती हैं।