जस्टिस सूर्यकांत ने ली शपथ, बने देश के 53वें चीफ जस्टिस
Justice Surya Kant takes oath as CJI: जस्टिस सूर्यकांत ने राष्ट्रपति भवन में भारत के चीफ जस्टिस के तौर पर शपथ ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें शपथ दिलाई।
53rd CJI Justice Surya Kant: देश को नया मुख्य न्यायाधीश मिल गया है। जस्टिस सूर्यकांत ने राष्ट्रपति भवन में भारत के चीफ जस्टिस के तौर पर शपथ ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें शपथ दिलाई। जस्टिस सूर्यकांत को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 53वें सीजेआई के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई।
इस मौके पर भूटान, मलेशिया, नेपाल और श्रीलंका समेत कई देशों के मुख्य न्यायाधीश भी मौजूद रहे। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद रहे। उनके शपथ समारोह में कई महान हस्तियों के साथ सात देशों के चीफ जस्टिस भी शामिल हुए। जस्टिस सूर्यकांत अनुच्छेद 370 से जुड़े, बिहार में SIR और पेगासस स्पाइवेयर मामला समेत कई अहम फैसलों का हिस्सा रह चुके हैं।
कौन हैं जस्टिस सूर्यकांत?
हरियाणा के हिसार में 10 फरवरी, 1962 को जस्टिस सूर्यकांत का जन्म हुआ है। इस समय वो सुप्रीम कोर्ट में CJI गवई के बाद सबसे सीनियर जज हैं। जस्टिस सूर्यकांत ने साल 1981 में हिसार के गवर्नमेंट पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज से ग्रेजुएशन किया है। साल 1984 में उन्होंने रोहतक की महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी से लॉ की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने हिसार की जिला अदालत में प्रैक्टिस शुरू कर दी थी। एक साल बाद वे पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में प्रैक्टिस करने लगे।
साल 2004 में जस्टिस सूर्यकांत को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का स्थायी न्यायाधीश नियुक्त किया गया था। वो 5 अक्टूबर 2018 को हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने। वहीं, 24 मई 2019 को जस्टिस सूर्यकांत को सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश बनाया गया था।
महत्वपूर्ण मामले
- चुनाव आयोग को बिहार में मसौदा मतदाता सूची से बाहर किए गए 65 लाख मतदाताओं का ब्योरा सार्वजनिक करने का निर्देश दिया था।
- उस संविधान पीठ का भी हिस्सा थे, जिसने अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर राज्य का विशेष दर्जा समाप्त करने के केंद्र सरकार के फैसले को बरकरार रखा था।
- ओआरओपी (वन रैंक वन पेंशन) को संाविधानिक रूप से वैध माना और भारतीय सशस्त्र बलों में महिलाओं के लिए समान अवसरों का समर्थन किया।
- जस्टिस कांत उस पीठ का भी हिस्सा थे, जिसने असम से संबंधित नागरिकता के मुद्दों पर धारा 6ए की वैधता को बरकरार रखा था।
- जस्टिस कांत दिल्ली आबकारी शराब नीति मामले में अरविंद केजरीवाल को जमानत देने वाली पीठ के सदस्य थे। हालांकि, उन्होंने केजरीवाल की गिरफ्तारी को जायज ठहराया था।