कालका अग्निकांड हादसा: शहीद दमकल कर्मियों को नम आंखों से श्रद्धांजलि, परिवारों के लिए न्याय और सम्मान की मांग
रेवाड़ी। कालका स्टील कंपनी में लगी भीषण आग को बुझाते समय हुए ब्लास्ट में दो वीर दमकल कर्मियों रणबीर और भवी चंद शर्मा की दर्दनाक शहादत ने पूरे क्षेत्र को गहरे शोक में डुबो दिया है। यह हादसा न केवल दो जिंदगियों का अंत था, बल्कि दो परिवारों के सपनों, उम्मीदों और सहारे को भी छीन ले गया। इस हृदयविदारक घटना के बाद हरियाणा अग्निशमन विभाग यूनियन की रेवाड़ी शाखा द्वारा शहीद कर्मियों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। कार्यक्रम के दौरान माहौल बेहद भावुक रहा। उपस्थित सभी लोगों ने नम आंखों से दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखा।
मुख्य अग्निशमन कर्मी रविन्द्र ने हादसे की जानकारी देते हुए कहा कि जब कोई दमकल कर्मचारी आग की सूचना पर मौके पर पहुंचता है, तो उसे वहां छिपे खतरों का अंदाजा नहीं होता। फिर भी वह अपनी जान की परवाह किए बिना दूसरों की जान बचाने के लिए आगे बढ़ता है। उन्होंने भावुक स्वर में कहा कि रणबीर और भवी चंद शर्मा भी अपने परिवारों की खुशियां छोड़कर, समाज की रक्षा के लिए निकले थे। उन्हें यह नहीं पता था कि वे उस दिन अपने घर वापस नहीं लौट पाएंगे।
आज उनके परिवारों की आंखों में आंसू हैं, बच्चों के सिर से पिता का साया उठ चुका है और बुजुर्ग माता-पिता अपने बेटों की राह देखते रह गए हैं। रविन्द्र ने कहा कि ऐसे वीर सपूतों का बलिदान कभी भुलाया नहीं जा सकता। सरकार की जिम्मेदारी है कि उनके परिवारों को अकेला न छोड़ा जाए। उन्होंने मांग की कि शहीद कर्मियों को शहीद का दर्जा दिया जाए, परिजनों को सरकारी नौकरी दी जाए और एक करोड़ रुपये का मुआवजा प्रदान किया जाए, ताकि वे सम्मान के साथ अपना जीवन आगे बढ़ा सकें।
उन्होंने यह भी कहा कि दमकल कर्मी हर दिन मौत से आंख मिलाकर ड्यूटी निभाते हैं, लेकिन हादसे के बाद उनके परिवारों के लिए कोई ठोस सुरक्षा व्यवस्था न होना बेहद पीड़ादायक है। भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचाव के लिए विशेष सुरक्षा नियम, आधुनिक उपकरण और कल्याणकारी योजनाएं बनाई जानी चाहिए।
यूनियन पदाधिकारियों ने सरकार से अपील करते हुए कहा कि रणबीर और भवी चंद शर्मा का बलिदान व्यर्थ न जाए। उनके परिवारों को न्याय, सम्मान और सहारा देना ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी। पूरे क्षेत्र ने एक स्वर में शहीदों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए उनके साथ खड़े रहने का संकल्प लिया।