हिमाचल की आर्थिकी को बड़ा झटका: केंद्र की ओर से RDG बंद होने से गहराया आर्थिक संकट
Revenue Deficit Grant: हिमाचल प्रदेश, जो पहले से ही भारी कर्ज के बोझ तले दबा हुआ है, के लिए केंद्र सरकार की ओर से मिलने वाली राजस्व घाटा अनुदान (RDG) में भारी कटौती या इसे बंद करने की आहट ने राज्य सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इसे राज्य के विकास और कर्मचारियों की देनदारियों के लिए एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि 2019 से 2025 तक हिमाचल को 48 हजार करोड़ रुपये RDG के रूप में मिले, लेकिन इस संवैधानिक अनुदान का अचानक बंद होना प्रदेश के लिए गंभीर आर्थिक संकट पैदा करेगा। उन्होंने कहा कि 1952 से हिमाचल को RDG मिलता आ रहा है, इसे ऐसे हालात में रोका जाएगा। ऐसी कल्पना भी नहीं की थी।
उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यह वक्त पार्टी लाइन से ऊपर उठने का है न कि राजनीति करने का। RDG को बचाने के लिए सभी दलों को एकजुट होकर केंद्र सरकार से बात करनी होगी। 8 फरवरी को इस मुद्दे पर प्रेजेंटेशन दी जाएगी, ताकि हर विधायक को इस स्थिति की गंभीरता समझाई जा सके।
मुख्यमंत्री ने GST को लेकर केंद्र को घेरा
GST पर भी मुख्यमंत्री ने केंद्र को घेरते हुए कहा कि GST का फायदा केवल बड़े राज्यों को हुआ है, जबकि हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्यों को नुकसान झेलना पड़ा है। सांसद अनुराग ठाकुर को चुनौती देते हुए सीएम सुक्खू ने कहा कि वे स्पष्ट करें कि RDG बंद होने के पक्ष में हैं या विरोध में।
बीजेपी के बयानों पर पलटवार करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल को मैदानी राज्यों की कतार में खड़ा करना गलत है। 68 प्रतिशत भूमि वन क्षेत्र, 28 प्रतिशत फॉरेस्ट कवर और पांच नदियों वाला हिमाचल पर्यावरण बचाकर विकास करता है।
ऐसे पहाड़ी राज्य के विकास के लिए RDG जीवनरेखा है। उन्होंने कहा कि RDG बंद होने का असर प्रदेश की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा और इसके लिए प्रदेश की जनता को भी संघर्ष के लिए तैयार रहना होगा।
क्या है मुख्य कारण?
15वें वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार, हिमाचल प्रदेश को मिलने वाली आरडीजी की राशि में हर साल कटौती की जा रही है। वित्त वर्ष 2025-26 के अंत तक इस अनुदान के बेहद कम होने या बंद होने की संभावना है, जिससे हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य के लिए अपने खर्चों को पूरा करना एक बड़ी चुनौती बन जाएगा।