आज देशभर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, ऑपरेशन सिंदूर की थीम पर सजा मंदिर
Krishna Janmashtami 2025: देशभर में आज श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई जा रही है। भगवान श्री कृष्ण के जन्मदिन ‘जन्माष्टमी’ को मनाने के लिए यूपी का मथुरा और वृंदावन सजकर तैयार है।
Krishna Janmashtami: देशभर में आज श्रीकृष्ण जन्माष्टमी मनाई जा रही है। मथुरा-वृंदावन में श्रीकृष्ण जन्म उत्सव की धूम है। 10 लाख भक्त वृंदावन में मौजूद हैं। बांके बिहारी मंदिर के बाहर लंबी लाइनें हैं। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हैं। सीएम योगी आज जन्मोत्सव में शामिल होंगे। मथुरा-वृंदावन में श्रीकृष्ण जन्म उत्सव की धूम है। 10 लाख भक्त वृंदावन में मौजूद हैं। बांके बिहारी मंदिर के बाहर लंबी लाइनें हैं।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर ठाकुरजी को अर्पित होने वाली पोशाक को 6 महीने में मथुरा के कारीगरों ने तैयार किया है। इसमें सोने-चांदी के तारों का इस्तेमाल किया गया है। कपड़े में इंद्रधनुष के 7 रंगों को रखा गया है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि मंदिर को ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की थीम पर सजाया गया है। जिस फूल बंगला में ठाकुरजी विराजेंगे, उसको सिंदूरी रंग के फूलों से सजाया गया है। ये फूल कोलकाता और बेंगलुरु से मंगाए गए हैं। यहीं से ठाकुरजी भक्तों को दर्शन देंगे।
कृष्ण जन्माष्टमी 2025 शुभ मुहूर्त और तिथि
अष्टमी तिथि शुरुआत: 15 अगस्त 2025 को रात 11:49 बजे
अष्टमी तिथि खत्म: 16 अगस्त 2025 को रात 09:34 बजे
रोहिणी नक्षत्र शुरू: 17 अगस्त 2025 को सुबह 04:38 बजे
रोहिणी नक्षत्र समाप्त: 18 अगस्त 2025 को सुबह 03:17 बजे
चंद्रोदय की तिथि: 16 अगस्त को रात 10:46 बजे
जन्माष्टमी में पूजा करने की सही विधि
- जन्माष्टमी व्रत में अष्टमी के उपवास से पूजन और नवमी के पारण व्रत की पूर्ति होती है। इस व्रत के एक दिन पहले यानी सप्तमी के दिन हल्का और सात्विक भोजन ही करना चाहिए।
- व्रत वाले दिन प्रातः स्नान आदि से निवृत होकर सभी देवताओं को नमस्कार करें.
पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके बैठ जाएं। - हाथ में जल, फल और पुष्प लेकर व्रत का संकल्प लें।
- मध्यान्ह के समय काले तिल का जल छिड़क कर देवकी जी के लिए प्रसूति गृह बनाएं।
- अब इस सूतिका गृह में सुंदर सा बिछौना बिछाकर उस पर कलश स्थापित करें।
- भगवान कृष्ण और माता देवकी जी की मूर्ति या सुंदर चित्र स्थापित करें।
- देवकी, वासुदेव, बलदेव, नन्द, यशोदा और लक्ष्मी जी का नाम लेते हुए विधिवत पूजन करें।
- यह व्रत रात 12 बजे के बाद ही खोला जाता है। व्रत में अनाज का उपयोग नहीं किया जाता।
- फलाहार के रूप में कुट्टू के आटे की पकौड़ी, मावे की बर्फी और सिंघाड़े के आटे का हलवा खा सकते हैं।