TRAI और DoT का बड़ा फैसला, फर्जी कॉल वालों की आएगी शामत! अब अनजान कॉल में भी दिखेगा कॉलर का असली नाम

TRAI New Calling Service: अगर आप Unknown या फर्जी नंबर से आने वाले कॉल से परेशान हैं, तो TRAI और DoT एक ऐसी व्यवस्था लागू करने वाला है जिसके तहत अब आपको अपने मोबाइल स्क्रीन पर सिर्फ फर्जी कॉल करने वाले का नंबर ही नहीं दिखेगा बल्कि उसका नाम भी दिखेगा। TRAI and Department of […]
Khushi
By : Published: 29 Oct 2025 14:49:PM
TRAI और DoT का बड़ा फैसला, फर्जी कॉल वालों की आएगी शामत! अब अनजान कॉल में भी दिखेगा कॉलर का असली नाम

TRAI New Calling Service: अगर आप Unknown या फर्जी नंबर से आने वाले कॉल से परेशान हैं, तो TRAI और DoT एक ऐसी व्यवस्था लागू करने वाला है जिसके तहत अब आपको अपने मोबाइल स्क्रीन पर सिर्फ फर्जी कॉल करने वाले का नंबर ही नहीं दिखेगा बल्कि उसका नाम भी दिखेगा।

TRAI and Department of Telecommunications: अनजान नंबर से फोन आने पर बहुत से लोग परेशान हो जाते हैं। कभी-कभी लोगों को समझ में नहीं आता है कि कॉल रिसीव करें या नहीं। लेकिन अब यूजर्स की समस्या का जल्द ही समाधआन होने वाला है। अब मोबाइल की घंटी बजने पर फोन नंबर तो दिखाई देगा ही, इसके साथ ही फोन करने वाले का नाम भी दिखाई देगा। यह फीचर एक हफ्ते के भीतर शउरु हो जाएगा। टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी (TRAI) और डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशंस (Department of Telecommunications- DoT) ने यह फैसला किया है। यह सुविधा सबके लिए डिफॉल्ट रहेगी।

ऐसा होने पर स्कैम और स्पैम कॉल आप पहले ही पहचान सकेंगे। इस फैसले का मकसद धोखाधड़ी रोकना और डिजिटल सुरक्षा बढ़ाना है। यह सर्विस शुरुआती दौर में 4G और उससे नई तकनीक वाले नेटवर्क पर शुरू होगी। इससे लोगों को फर्जी कॉल से बचाने में मदद मिलेगी। 2G और 3G पर बैंडविड्थ कम होने से तकनीकी दिक्कत है। इसलिए इन नेटवर्क का इस्तेमाल करने वालों को कॉलर का असली नाम नहीं नजर आएगा।

60 दिन तक चलेगा पायलट

मनीकंट्रोल में छपी खबर के मुताबिक, DoT ने टेलीकॉम रेगुलेटर को अलग से बताया है कि ऑपरेटर्स ने 4G और नए नेटवर्क के लिए कॉलिंग नेम प्रेजेंटेशन (CNAP) सर्विस के ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। ऐसे में इसे फौरन रोलआउट करने का रास्ता साफ हो गया है। मनीकंट्रोल ने सूत्रों के हवाले से कहा है कि सरकार ने ऑपरेटर्स को पायलट शुरू करने के लिए सात दिन का समय दिया है, जो लगभग 60 दिनों तक चलेगा। इसके सफल रहने के बाद पूरे देश में ये सर्विस लागू होगी। कंपनियों को हर हफ्ते इसकी रिपोर्ट सरकार को देनी होगी। रिपोर्ट के आधार पर सरकार इसमें आने वाली दिक्कतों को दूर करेगी।

हालांकि, पहले ट्राई ने सुझाव दिया था कि यह सेवा सिर्फ मांगने पर चालू होनी चाहिए। लेकिन DoT इस बात से सहमत नहीं था। इसके बाद दोनों की एकराय बनी और फैसला लिया गया। यह नाम वही होगा जो यूजर ने मोबाइल नंबर कनेक्शन लेते समय आईडी प्रूफ में दिया होगा। यह डिफाल्ट सुविधा होगी। अगर कोई यूजर यह सुविधा नहीं चाहता, तो वह इसे डिएक्टिवेट भी करा सकेगा। इस सर्विस के लिए टेलीकॉम कंपनियों ने मुंबई और हरियाणा सर्किल में पिछले साल ट्रायल किया था।

यह कदम देशभर में धोखाधड़ी वाली कॉल्स और साइबर अपराधों जैसे डिजिटल अरेस्ट और वित्तीय घोटालों को रोकने के लिए उठाया गया है। इससे उपभोक्ता को पता होगा कि उसे कौन कॉल कर रहा है, जिससे वह फर्जी कॉल्स को पहचानने में सक्षम होगा।

क्या है नियम का सीधा अर्थ

इसका अर्थ है कि कॉलर ने जो नाम और नंबर सिम लेते हुए लिया होगा वही असली नाम आपको दिखेगा. इस तरह फर्जी नाम से कॉल करने वालों और धोखाधड़ी वाले कॉल्स से आपके राहत मिल सकेगी क्योंकि आपको असली नाम कॉल के समय ही दिख सकेंगे।

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