नालागढ़ के सिविल अस्पताल को खुद वैंटिलेटर की जरूरत, खस्ता हालत मे खड़ी एंबुलेंस, जोखिम में फंसी मरीज की जान हो गया बवाल
Civil Hospital of Nalagarh: हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले के औद्योगिक क्षेत्र नालागढ़ का सिविल अस्पताल एक बार फिर अपनी अव्यवस्थाओं और लचर स्वास्थ्य सेवाओं के कारण सुर्खियों में है। सोमवार रात का एक ताजा मामला सामने आया है, जिसमें एक मरीज की जान खतरे में पड़ गई। इस घटना ने न केवल अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं, बल्कि 108 एम्बुलेंस सेवाओं की खस्ता हालत और सरकार की उदासीनता को भी उजागर किया है।
बता दें कि सोमवार रात को एक मरीज गंभीर हालत में नालागढ़ सिविल अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचा। मरीज की प्रारंभिक जांच के बाद डॉक्टरों ने उसे एक इंजेक्शन लगाया और बताया कि उसे हार्ट अटैक की शिकायत है। डॉक्टरों ने मरीज को तुरंत अपने परिजनों को बुलाने और पीजीआई चंडीगढ़ रेफर होने की सलाह दी। मरीज ने अपने रिश्तेदारों को बुलाया और 108 एम्बुलेंस के जरिए पीजीआई चंडीगढ़ के लिए रवाना हुआ। लेकिन, रास्ते में एम्बुलेंस की खराब हालत ने स्थिति को और गंभीर कर दिया।
रास्ते में खराब हुई एम्बुलेंस, डर के मारे मरीज के सुखे प्राण
चंडीगढ़ जाते समय 108 एम्बुलेंस अचानक रास्ते में खराब हो गई, जिसके कारण मरीज और उसके परिजन करीब 15 मिनट तक सड़क पर फंसे रहे। इस दौरान मरीज की हालत को लेकर परिजनों में दहशत का माहौल था। आनन-फानन में दूसरी एम्बुलेंस बुलाई गई, तब जाकर मरीज को पीजीआई चंडीगढ़ पहुंचाया जा सका। लेकिन, पीजीआई पहुंचने पर मरीज को एक और झटका लगा। वहां के डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि मरीज को हार्ट अटैक की कोई शिकायत नहीं है और वह पूरी तरह ठीक है।
इस बात से हैरान मरीज अनवर और उसके परिजनों ने नालागढ़ सिविल अस्पताल के डॉक्टरों और प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए। मरीज ने कहा, “अगर मुझे कोई समस्या नहीं थी, तो मुझे पीजीआई क्यों रेफर किया गया? और अगर मुझे हार्ट अटैक होता, तो रास्ते में खराब एम्बुलेंस के कारण मेरी जान भी जा सकती थी।” मरीज ने इस लापरवाही के लिए अस्पताल प्रशासन और संबंधित डॉक्टर को जिम्मेदार ठहराया।
स्थानीय विधायक और मुख्यमंत्री से पूरे मामले की की शिकायत
इस घटना से आक्रोशित मरीज ने हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और स्थानीय विधायक बावा हरदीप सिंह से इस मामले की शिकायत की है। मरीज ने मांग की है कि अस्पताल की अव्यवस्थाओं और 108 एम्बुलेंस की खराब स्थिति को तुरंत ठीक किया जाए, ताकि भविष्य में किसी अन्य मरीज को ऐसी परेशानी न झेलनी पड़े। विधायक बावा हरदीप सिंह ने मरीज को आश्वासन दिया है कि इस मामले को गंभीरता से उठाया जाएगा और उच्च अधिकारियों से बात की जाएगी।
जब इस मामले में नालागढ़ के ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (बीएमओ) कविराज नेगी से बात करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने पहले तो कैमरे पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। बाद में उच्च अधिकारियों से बात करने की बात कहने पर उन्होंने कैमरे पर बयान दिया। बीएमओ ने 108 एम्बुलेंस की खराब हालत को स्वीकार करते हुए कहा, “हमने इस बारे में पहले ही उच्च अधिकारियों और संबंधित कंपनी को शिकायत भेज दी है। नालागढ़ में तीन 108 एम्बुलेंस हैं, और तीनों की हालत खराब है।” उन्होंने यह भी बताया कि मरीज को तभी रेफर किया जाता है, जब उसकी हालत गंभीर हो। साथ ही, उन्होंने स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की कमी का हवाला देते हुए कहा कि इस मुद्दे पर भी सरकार को लिखा गया है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
नालागढ़ से हर साल सरकार को जाता है करोड़ो रुपये का टैक्स
नालागढ़ हिमाचल प्रदेश का एक प्रमुख औद्योगिक हब है, जहां से सरकार को हर साल करोड़ों रुपये का टैक्स प्राप्त होता है। लेकिन, इस क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति बेहद दयनीय है। सिविल अस्पताल में न तो पर्याप्त डॉक्टर हैं, न ही विशेषज्ञ चिकित्सक। इसके अलावा, जांच के लिए जरूरी मशीनें और उपकरण भी अपर्याप्त हैं। 108 एम्बुलेंस सेवाएं, जो आपातकालीन स्थिति में मरीजों के लिए जीवन रक्षक साबित हो सकती हैं, उनकी हालत भी जर्जर है। स्थानीय लोगों का कहना है कि गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए उन्हें चंडीगढ़ या अन्य बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है, जिससे समय और धन दोनों की बर्बादी होती है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि सरकार भले ही स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने के बड़े-बड़े दावे करे, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है। स्थानीय लोगों ने कहा, “यहां के लोग टैक्स देते हैं, लेकिन बदले में उन्हें बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं भी नहीं मिल रही हैं। सरकार को इस ओर तुरंत ध्यान देना चाहिए।”
मरीजों और स्थानीय लोगों ने सरकार से मांग की है कि सिविल अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती की जाए, जांच उपकरणों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए और 108 एम्बुलेंस सेवाओं को दुरुस्त किया जाए। साथ ही, ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी उठ रही है।
देखना होगा कि सरकार इस मामले को कितनी गंभीरता से लेती है और नालागढ़ के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं कब तक उपलब्ध हो पाती हैं। फिलहाल, यह घटना नालागढ़ के स्वास्थ्य ढांचे की बदहाली की एक दुखद तस्वीर पेश करती है, जो सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है।