Health Tip: भारत में हर साल 5700 लोग गंवाते हैं अपनी जान, 2030 तक भारत को रेबीज मुक्त बनाने का लक्ष्य…..

Health Tip: रेबीज एक वायरल बीमारी है, जो आमतौर पर संक्रमित जानवरों, खासकर कुत्तों के काटने से फैलती है। यह वायरस मस्तिष्क पर हमला करता है और एक बार लक्षण सामने आने पर यह बीमारी लगभग 100% जानलेवा हो जाती है। इस संदर्भ में चेन्नई के डॉ. मनोज मुरहेकर कहते हैं कि रेबीज एक ऐसी […]
Khushi
By : Updated On: 07 Jul 2025 13:15:PM
Health Tip: भारत में हर साल 5700 लोग गंवाते हैं अपनी जान, 2030 तक भारत को रेबीज मुक्त बनाने का लक्ष्य…..

Health Tip: रेबीज एक वायरल बीमारी है, जो आमतौर पर संक्रमित जानवरों, खासकर कुत्तों के काटने से फैलती है। यह वायरस मस्तिष्क पर हमला करता है और एक बार लक्षण सामने आने पर यह बीमारी लगभग 100% जानलेवा हो जाती है। इस संदर्भ में चेन्नई के डॉ. मनोज मुरहेकर कहते हैं कि रेबीज एक ऐसी बीमारी है, जिसे अगर समय रहते पहचान लिया जाए और सही टीकाकरण हो जाए तो 100% रोका जा सकता है। लेकिन जागरूकता की कमी और चिकित्सा सुविधाओं तक देरी से पहुंच के कारण यह जानलेवा साबित होती है।

रेबीज मुक्त भारत

हमारे देश में कई ऐसी बीमारियाँ हैं, जो सालों से लोगों की जान ले रही हैं, लेकिन उन पर शायद ही कभी चर्चा होती है। ऐसी ही एक बीमारी है रेबीज। सड़क पर पागल कुत्तों का घूमना, एक छोटा सा खरोंच या काटने का निशान और फिर धीरे-धीरे लक्षणों की गंभीरता बढ़ना, यही रेबीज का असली डर है। भारत में हर साल रेबीज के कारण करीब 5700 मौतें होती हैं। आईसीएमआर की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि सरकार का लक्ष्य 2030 तक ‘शून्य मृत्यु’ हासिल करना है।

हाल ही में आईसीएमआर (भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद) की एक रिपोर्ट में रेबीज से जुड़ा एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हर साल करीब 5700 लोग रेबीज के कारण अपनी जान गंवाते हैं। इसलिए सरकार ने 2030 तक ‘शून्य मृत्यु’ का लक्ष्य तय किया है।

आईसीएमआर की रिपोर्ट के मुख्य बिंदु क्या हैं?

  • -भारत में हर साल औसतन 5700 मौतें रेबीज के कारण होती हैं
  • -कुत्तों के काटने की घटनाएं ग्रामीण और शहरी दोनों ही इलाकों में चिंता का विषय हैं
  • -इलाज और समय पर वैक्सीन के बारे में सही जानकारी न मिलने की वजह से कई मरीज अपनी जान गंवा देते हैं
  • -रिपोर्ट में कहा गया है कि स्कूल स्तर पर पालतू जानवरों के बारे में जागरूकता, टीकाकरण और निगरानी बहुत जरूरी है
  • 2030 तक ‘शून्य मृत्यु’ का लक्ष्य – क्या यह संभव है?
  • -भारत सरकार ने विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ मिलकर 2030 तक देश को रेबीज मुक्त बनाने का संकल्प लिया है
  • -मुफ्त एंटी-रेबीज वैक्सीन उपलब्ध कराना
  • -कुत्तों के लिए नसबंदी और टीकाकरण कार्यक्रम
  • -आम जनता, खासकर ग्रामीण इलाकों में जागरूकता अभियान
  • -प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर आपातकालीन उपचार की व्यवस्था

रेबीज कोई नई बीमारी नहीं है, लेकिन आज भी इसकी वजह से सैकड़ों लोगों की जान चली जाती है। आईसीएमआर की रिपोर्ट चेतावनी है कि अगर हम जागरूक नहीं हुए तो 2030 तक ‘जीरो डेथ’ का सपना अधूरा रह जाएगा। आइए हम सब मिलकर जागरूकता फैलाएं और इस ‘साइलेंट डेथ की बीमारी’ को जड़ से खत्म करें।

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