देश में 12 राज्यों में आज से शुरू होगा स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR), 21 साल बाद दूसरा चरण

Latest News: विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) को लेकर आज चुनाव आयोग ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में अहम घोषणा की। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बताया कि देश के 12 राज्यों में SIR किया जाएगा। ये SIR का दूसरा चरण होगा, जिसकी शुरुआत आज रात 12 बजे के बाद होगी। चुनाव आयोग बताया कि […]
Khushi
By : Updated On: 27 Oct 2025 17:35:PM
देश में 12 राज्यों में आज से शुरू होगा स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR), 21 साल बाद दूसरा चरण

Latest News: विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) को लेकर आज चुनाव आयोग ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में अहम घोषणा की। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बताया कि देश के 12 राज्यों में SIR किया जाएगा। ये SIR का दूसरा चरण होगा, जिसकी शुरुआत आज रात 12 बजे के बाद होगी।

चुनाव आयोग बताया कि SIR का उद्देश्य योग्य वोटरों को लिस्ट में शामिल करना और अयोग्य वोटरों को मतदाता सूची से बाहर करना है।

राज्य/केंद्रशासित प्रदेशमतदाता (लाख में)
अंडमान और निकोबार3.10
छत्तीसगढ़212.30
गोवा11.85
गुजरात508.39
केरल278.50
लक्षद्वीप0.58
मध्य प्रदेश574.05
पुदुचेरी10.21
राजस्थान548.85
तमिलनाडु641.15
उत्तर प्रदेश1544.24
पश्चिम बंगाल766.24
कुल5099.46 (51 करोड़)

देश में 21 साल पहले हुआ था आखिरी बार SIR

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ने बताया कि देश में आखिरी बार स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन 21 साल पहले हुआ था। अब इसमें बदलाव जरूरी है।

सभी मतदाताओं के घर कम के कम तीन बार जाएंगे BLO

बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) प्रत्येक मतदाता के घर कम से कम तीन बार दौरा करेंगे। जिससे नए मतदाताओं को लिस्ट में जोड़ा जा सके और किसी भी गलती को सुधारा जा सके।

SIR क्या होता है?

SIR यानी स्पेशल इंटेसिव रिवीजन यानी विशेष गहन पुनरीक्षण एक प्रक्रिया है, जिसके तहत भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा मतदाता सूची को अपडेट और शुद्ध किया जाता है। इस प्रक्रिया के द्वारा मतदाता सूची में त्रुटियों को दूर किया जाता है, फर्जी या पुरानी प्रविष्टियों को हटाया जाता है और नई योग्यता वाले मतदाताओं को सूची में शामिल किया जाता है। इस प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करने के लिए अमल में लाया जाता है।

स्पेशल इंटेसिव रिवीजन (SIR) का मुख्य फायदा ये है कि मतदाता सूची की सटीकता बढ़ती है, फर्जी वोटिंग रुकती है और नए मतदाताओं को आसानी से शामिल किया जाता है। हालांकि इसको लेकर कुछ चुनौतियां भी हैं, जिसमें दस्तावेज न होने पर नाम कटने का खतरा होता है, जिससे ग्रामीण/प्रवासी क्षेत्रों में मतदाता को कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है।

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