आवारा पशुओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला, शैक्षणिक संस्थानों और अस्पतालों परिसरों से हटाने का निर्देश
Supreme Court Bans Stray Dogs: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को आवारा कुत्तों पर सुनवाई करते हुए बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने देशभर के सभी शैक्षणिक संस्थानों और अस्पतालों परिसरों से आवारा कुत्तों को हटाने का निर्देश दिया है।
SC Directive on Stray Dogs: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को देशभर में बढ़ती आवारा कुत्तों की समस्या पर सख्त रुख अपनाते हुए आदेश दिया है कि शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों, बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों और अन्य सार्वजनिक स्थलों से आवारा कुत्तों को तुरंत हटाया जाए। अदालत ने स्पष्ट किया कि इन कुत्तों को सुरक्षित डॉग शेल्टरों में स्थानांतरित किया जाए और उन्हें उसी स्थान पर वापस नहीं छोड़ा जाए जहां से उन्हें पकड़ा गया था।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली पीठ ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि वे इस संबंध में अमाइकस क्यूरी (न्याय मित्र) द्वारा प्रस्तुत सुझावों को लागू करें। अदालत ने कहा कि सार्वजनिक स्थानों पर आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या न केवल लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि बच्चों, मरीजों और बुजुर्गों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है।
आवारा कुत्तों पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश
- शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों, बस स्टैंड, खेल परिसरों, रेलवे स्टेशन आदि से आवारा कुत्तों को हटाया जाए।
- इन आवारा कुत्तों को डॉग शेल्टर होम भेजा जाए।
- उन्हें उसी स्थान पर नहीं छोड़ा जाना चाहिए जहां से उन्हें उठाया गया था। जितनी जल्दी हो सके या 8 हफ्ते के बीच हटाया जाए।
- कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त किए जाएं।
सुप्रीम कोर्ट ने शैक्षणिक संस्थानों, अस्पतालों, बस अड्डों समेत सार्वजनिक स्थलों से आवारा कुत्तों को हटाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि अमाईकस प्रस्तुत रिपोर्ट को रिकॉर्ड में लिया जाए और यह SC के आदेश का हिस्सा होगी। प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश अदालत के निर्देशों और अमाइकस की रिपोर्ट का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए व्यापक हलफनामे दायर करेंगे।
कैसे शुरू हुआ यह मामला
यह मामला सुप्रीम कोर्ट ने 28 जुलाई को एक मीडिया रिपोर्ट पर स्वयं नोटिस में लिया था। इसमें दिल्ली में खासकर बच्चों के बीच,आवारा कुत्तों के काटने और उससे होने वाले रेबीज के मामलों की जानकारी दी गई थी। बाद में, सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले का दायरा दिल्ली-एनसीआर तक सीमित न रखते हुए इसे सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए कर दिया था।