दिल्ली ब्लास्ट केस में बड़ा खुलासा, DNA टेस्ट से पुष्टि आतंकी उमर ही ड्राइव कर रहा था ब्लास्ट हुई i20 कार
Delhi Blast Case: लाल किले के पास हुए कार ब्लास्ट में नया मोड़ आया है। डीएनए रिपोर्ट से खुलासा हुआ कि विस्फोट का मास्टरमाइंड कश्मीर का डॉक्टर उमर था, जो जैश-ए-मोहम्मद के मॉड्यूल से जुड़ा था।
Dr Umar DNA in Delhi Blast: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में लाल किले के पास सोमवार की शाम भीषण ब्लास्ट हुआ। ये ब्लास्ट एक चलती हुई कार में हुआ जिसकी चपेट में कई अन्य गाड़ियां आ गईं। इस ब्लास्ट में अब तक 11 लोगों की मौत हो गई है और 29 लोग घायल हैं। इनमें से 5 घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है। लाल किले के पास जिस कार में ब्लास्ट हुआ वो एक i20 कार थी। इस कार को चला रहे शख्स की पहचान डॉक्टर मोहम्मद उमर के रूप में की गई है। उमर को फरीदाबाद मॉड्यूल से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है।
लाल किले के पास में हुए धमाके के दौरान कार में बैठा शख्स आतंकी डॉ उमर मोहम्मद था। डीएनए टेस्ट में आतंकी डॉ उमर मोहम्मद और उसकी मां का सैंपल 100 परसेंट मैच कर गया है। इस धमाके में आतंकी उमर मोहम्मद के चिथड़े-चिथड़े उड़ गए। धमाके के बाद कार में उमर मोहम्मद के शरीर के कुछ टुकड़े जली हुई अवस्था में मिले थे।
इस वजह से जांच एजेंसियों के लिए टेररिस्ट उमर मोहम्मद की पहचान को स्थापित करना मुश्किल हो गया था। विस्फोट स्थल से एकत्र किए गए नमूनों के डीएनए परीक्षण से पुष्टि हुई है कि आतंकी डॉ. उमर उस कार को चला रहा था जिसमें धमाका हुआ था। उमर की मां के डीएनए नमूने मंगलवार को पुलवामा से एकत्र किए गए और जांच के लिए यहां दिल्ली भेजे गए। विस्फोट स्थल से एकत्र किए गए अवशेषों, बॉडी पार्ट्स के साथ उनका भी विश्लेषण किया गया।
सदमे में उमर का परिवार
डॉ. उमर के पुलवामा स्थित परिवार को जब उसकी पहचान की जानकारी दी गई, तो वे अविश्वास में थे। एक रिश्तेदार ने कहा, “वह शांत स्वभाव का था, कभी किसी से दुश्मनी नहीं रखी।” हालांकि पुलिस का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में उसका व्यवहार संदिग्ध हो गया था और वह धार्मिक कट्टरपंथियों के संपर्क में था।
तुकीं से मिले थे आतंकी निर्देश
पुलिस की जांच में एक और चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि उमर और उसके साथी डॉ. मुजम्मिल तुर्की की यात्रा पर गए थे, जहां से उनके हैंडलरों ने उन्हें आतंकी हमले के निर्देश दिए। उनके पासपोर्ट पर तुर्की की यात्रा के प्रमाण भी मिले हैं। बताया जा रहा है कि यह नेटवर्क टेलीग्राम ग्रुप्स के ज़रिए सक्रिय था, जहां से कट्टरपंथी विचारों का प्रचार किया जाता था।