हरियाणा पुलिस ने किया कमाल, ऑपरेशन ट्रैक डाउन में 4200 से अधिक पहुंचे सलाखों के पीछे पहुंचा रचा इतिहास

Haryana Police: अभियान ‘ऑपरेशन ट्रैक डाउन’ ने प्रदेशभर में अपराधियों पर सख्त शिकंजा कसते हुए बड़ी सफलता हासिल की। इस अभियान में गुरुग्राम पुलिस सबसे आगे रही, जिसने 133 मुकदमों में कार्रवाई करते हुए 175 कुख्यात अपराधियों को गिरफ्तार किया। Haryana Police”s Operation Track Down: हरियाणा पुलिस के ‘ऑपरेशन ट्रैकडाउन‘ ने अपने शुरुआती दिनों में […]
Jaspreet Singh
By : Updated On: 21 Nov 2025 20:00:PM
हरियाणा पुलिस ने किया कमाल, ऑपरेशन ट्रैक डाउन में 4200 से अधिक पहुंचे सलाखों के पीछे पहुंचा रचा इतिहास

Haryana Police: अभियान ‘ऑपरेशन ट्रैक डाउन’ ने प्रदेशभर में अपराधियों पर सख्त शिकंजा कसते हुए बड़ी सफलता हासिल की। इस अभियान में गुरुग्राम पुलिस सबसे आगे रही, जिसने 133 मुकदमों में कार्रवाई करते हुए 175 कुख्यात अपराधियों को गिरफ्तार किया।

Haryana Police”s Operation Track Down: हरियाणा पुलिस के ‘ऑपरेशन ट्रैकडाउन‘ ने अपने शुरुआती दिनों में ही साबित कर दिया है कि यह प्रदेश में चलाया गया अब तक का सबसे बड़ा और सबसे प्रभावी अभियान है। इस महाअभियान के तहत पुलिस ने 15 इनामी अपराधियों सहित 38 बड़े कुख्यात अपराधियों को पकड़ने में सफलता हासिल की है। ये 38 अपराधी इनामी बदमाश थे जिन पर 50 हजार रूपए से 13 हजार रूपए तक का इनाम था।

इन बड़े अपराधियों द्वारा कुल 220 वारदातों को अंजाम दिया गया। जबकि इसी प्रकार अन्य 3800 आरोपियों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे पहुंचाया। कार्रवाई की व्यापकता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पुलिस ने 229 हथियार, 342 कारतूस, 8 मैगजीन के साथ-2 अन्य हथियार जैसे चाकू और तलवारें इत्यादि भी बरामद कीं।

अपराधियों से कारें, चाकू, तलवार आदि भी पुलिस ने कब्जे में ली हैं। ये गिरोह हत्या, लूट और अन्य जघन्य वारदातों की योजना बना रहे थे जिन्हें पुलिस ने समय रहते नाकाम कर अनगिनत निर्दाेष लोगों की जान बचाई है। अभियान की ऐतिहासिक सफलता को देखते हुए ‘ऑपरेशन ट्रैकडाउन’ को एक सप्ताह और बढ़ा दिया गया है, ताकि कुख्यात अपराधियों के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त कर राज्य को और अधिक सुरक्षित बनाया जा सके। ‘ऑपरेशन ट्रैकडाउन‘ हरियाणा को भयमुक्त और सुरक्षित बनाने की दिशा में पुलिस की निर्णायक उपलब्धि के रूप में उभरा है।

हरियाणा पुलिस के अब तक के सबसे बड़े अभियान ‘ऑपरेशन ट्रैकडाउन’ ने प्रदेश में कानून-व्यवस्था को नई मजबूती दी है। अभियान के दौरान कुल 1,941 अपराधियों की पहचान की गई, जिनमें से 1,392 को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे पहुंचाया जा चुका है। साथ ही 2,834 अन्य अपराधियों को गिरफतार किया गया। इस प्रकार अब तक कुल 4226 अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुंचाया गया है। अपराध पर निगरानी मजबूत करने के लिए पुलिस ने 748 नई हिस्ट्रीशीट खोली और 840 हिस्ट्रीशीट अपडेट की हैं। गौरतलब है कि हिस्ट्री शीट तब खोली जाती है जब किसी व्यक्ति को आदतन अपराधी माना जाए या उसका नाम पुलिस के सर्विलांस रजिस्टर में दर्ज हो। अगर पहले से हिस्ट्री शीट नहीं है, तो थाना प्रभारी नियमानुसार नई शीट तैयार करता है। यह प्रक्रिया अपराधी की गतिविधियों, रिश्तों और आदतों को दर्ज कर उसके लगातार निगरानी में रखने के लिए होती है।

हत्या की साजिश नाकाम: 113 अपराधी दबोचे

ऑपरेशन ट्रैक डाउन में 113 अपराधियों को उस समय गिरफ्तार किया गया, जब वे हत्या या हत्या के प्रयास जैसी जघन्य वारदातों की योजना बना रहे थे। पुलिस की तत्पर कार्रवाई से इनकी पूरी साजिश नाकाम हो गई। इस अभियान ने 52 व्यक्तियों और एक पूरे परिवार की जान बचाई, जो इन अपराधियों के निशाने पर थे। यह उपलब्धि साबित करती है कि हरियाणा पुलिस न केवल अपराधियों को पकड़ रही है, बल्कि समय रहते जानें भी बचा रही है। यही इसकी सबसे बड़ी सफलता है। इन आरोपियों के पास से 90 पिस्तौल, 153 कारतूस, 8 मैगजीन आदि बरामद किए गए हैं।

’670 अपराधियों की निवारक कार्यवाही, 84 की जमानत रद्द-कानून का सख्त संदेश’

अभियान के दबाव और पुलिस की सख्त मॉनिटरिंग के चलते 670 अपराधियों की निवारक कार्यवाही की गई तथा उन्होंने अच्छा व्यवहार अपनाने व अपराध ना करने का वचन दिया है। इसके साथ ही 84 अपराधियों की जमानत रद्द कर उन्हें दोबारा न्यायिक प्रक्रिया के दायरे में लाया गया। यह कदम संगठित अपराध पर रोक लगाने और अपराधियों में कानून का भय कायम करने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ है। यह व्यापक कार्रवाई साबित करती है कि हरियाणा पुलिस का यह अभियान अपराध पर निर्णायक प्रहार है, जिसने राज्य में सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को नई दिशा दी है।

’अवैध संपत्तियों पर कड़ा प्रहारः 114 करोड़ की पहचान कर उनका कुर्की व ध्वस्तीकरण जारी’

हरियाणा पुलिस ने अपराधियों की आर्थिक कमर तोड़ने के लिए अवैध संपत्तियों पर बड़ी और निर्णायक कार्रवाई शुरू की है। अभियान के तहत अब तक 205 अपराधियों की संपत्तियों की स्पष्ट पहचान कर ली गई है। इनमें से 6 संपत्तियों को विधि अनुसार कुर्क किया गया, जबकि 3 अवैध निर्माणों को ध्वस्त कर दिया गया है। शेष 196 मामलों में कानूनी प्रक्रिया तेज़ी से जारी है, जिनमें कुर्की और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई अगले चरण में होगी।

उल्लेखनीय है कि केवल 9 कुख्यात अपराधियों की संपत्तियों का मूल्य ही ₹5,00,85,196 तक पहुँचता है, जबकि अब तक पहचानी गई सभी अवैध संपत्तियों की कुल अनुमानित कीमत ₹114 करोड़ 05 लाख 29 हजार 046 रुपये है। यह कार्रवाई साफ संकेत देती है कि हरियाणा पुलिस न केवल अपराधियों को गिरफ्तार कर रही है, बल्कि उनकी गैरकानूनी कमाई और आर्थिक नेटवर्क को ध्वस्त कर अपराध पर स्थायी प्रहार कर रही है, जिससे राज्य में अपराध का आधार ही कमजोर हो रहा है।

’बीएनएस की धारा 111ः संगठित अपराधियों के लिए सबसे कड़ा कानूनी हथियार’

भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 111 संगठित अपराध पर बेहद कठोर दंड का प्रावधान करती है। यदि किसी संगठित आपराधिक घटना में किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है, तो दोषी को मृत्यु-दंड या आजीवन कारावास दिया जा सकता है, साथ ही न्यूनतम दस लाख रुपये का जुर्माना भी अनिवार्य है। जबकि ऐसे अपराधों में मृत्यु न होने पर भी आरोपी को कम से कम पाँच वर्ष, जो बढ़कर आजीवन कारावास तक हो सकता है, तथा न्यूनतम पाँच लाख रुपये का दंड भुगतना पड़ता है। यह धारा बताती है कि संगठित अपराध पर कार्रवाई केवल गिरफ्तारी नहीं, बल्कि कठोर और दीर्घकालिक सज़ा देकर अपराध के नेटवर्क को पूरी तरह तोड़ने का मजबूत कानूनी साधन है।

गुरुग्राम सबसे आगे-16 दिनों में प्रदेशभर में बड़े स्तर पर गिरफ्तारियां

हरियाणा पुलिस के 16-दिवसीय विशेष अभियान ‘ऑपरेशन ट्रैक डाउन’ ने प्रदेशभर में अपराधियों पर सख्त शिकंजा कसते हुए बड़ी सफलता हासिल की। इस अभियान में गुरुग्राम पुलिस सबसे आगे रही, जिसने 133 मुकदमों में कार्रवाई करते हुए 175 कुख्यात अपराधियों को गिरफ्तार किया। इसके बाद झज्जर ने 108 और सोनीपत ने 100 गिरफ्तारियों के साथ उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। अभियान के दौरान सबसे अधिक कार्रवाई आर्म्स एक्ट के तहत हुई, जिसमें 280 मामलों में 321 आरोपी पकड़े गए। इसके अलावा, 230 प्रयास-हत्या मामलों में 310, 110 हत्या मामलों में 150, और 57 उगाही मामलों में 72 अपराधियों को सलाखों के पीछे भेजा गया। यह सघन अभियान प्रदेश में कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हुआ है।

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