हरियाणा पुलिस का सबसे बड़ा ड्रग-क्रैकडाउन अभियान- सिरसा, फतेहाबाद और डबवाली में 45 दिनों में रणनीति का ऐतिहासिक प्रभाव
चंडीगढ़– हरियाणा पुलिस ने 15 अक्तूबर से जिला सिरसा, फतेहाबाद और डबवाली में नशा तस्करी के विरुद्ध अब तक का सबसे समन्वित, खुफिया-आधारित और नेटवर्क-डिसरप्शन केंद्रित ऑपरेशन चलाया। यह अभियान दो अवधियों—01.09.2025 से 15.10.2025 तथा 16.10.2025 से 30.11.2025—के तुलनात्मक विश्लेषण में स्पष्ट रूप से दिखाता है कि पुलिस की नई रणनीति ने नशे के बड़े नेटवर्क को जड़ से झकझोर दिया।
एनडीपीएस मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि—नई रणनीति ने छिपे मॉड्यूल उजागर किए
दूसरी अवधि में तीनों जिलों में कुल 153 एनडीपीएस मामले दर्ज हुए, जबकि पिछली अवधि में यह संख्या 105 थी। सिरसा, फतेहाबाद और डबवाली में मामलों की वृद्धि यह दर्शाती है कि पुलिस ने तस्करों के उन नेटवर्क पॉइंट्स तक भी पहुंच बनाई, जो अब तक सतह से नीचे छुपे हुए थे। बढ़ी हुई केस संख्या अपराध बढ़ने का नहीं, बल्कि नेटवर्क के खुलासे का संकेत है।
तस्करों की बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियाँ—सप्लाई चेन पर निर्णायक प्रहार
गिरफ्तारियों की तुलना यह बताती है कि नई रणनीति ने तस्करों की रीढ़ तोड़ दी। पहले 45 दिनों में 257 गिरफ्तारियाँ हुई थीं, जबकि दूसरी अवधि में यह संख्या बढ़कर 342 हो गई। सिरसा में 83 और फतेहाबाद में 18 अधिक गिरफ्तारियाँ यह सिद्ध करती हैं कि मल्टी-टीम कोऑर्डिनेशन और इंटेलिजेंस-ड्रिवन छापेमार कार्रवाई ने तस्करों को जड़ से पकड़ा।
सप्लायरों की पहचान और गिरफ्तारी—नेटवर्क-आधारित कार्यवाही का सबसे बड़ा परिणाम
ड्रग सप्लाई चेन को ध्वस्त करने में दूसरी अवधि सबसे सफल रही। इस दौरान 160 सप्लायर चिह्नित किए गए और 86 गिरफ्तार किए गए, जबकि पिछली अवधि में 91 सप्लायरों की पहचान और 68 गिरफ्तारियाँ ही हो सकी थीं। 18 अतिरिक्त सप्लायरों की गिरफ्तारी यह साबित करती है कि पुलिस की नई रणनीति तस्करी की जड़ों पर सटीक वार कर रही है।
नशीले पदार्थों की बरामदगी में महत्वपूर्ण उछाल—हाई-रिस्क ड्रग्स पर कसा शिकंजा
तीनों जिलों में हेरोइन और अफीम की बरामदगी पहले की तुलना में बढ़ी है, जो दिखाता है कि पुलिस अब नशे के “हाई-प्रॉफिट, हाई-रिस्क” नेटवर्क को टारगेट कर रही है। हेरोइन की बरामदगी 1.215 किलोग्राम से बढ़कर 1.271 किलोग्राम हो गई, जबकि अफीम 11.97 किलोग्राम से बढ़कर 13.714 किलोग्राम हो गई। इससे यह स्पष्ट है कि अंतरराज्यीय नेटवर्क, विशेषकर राजस्थान और पंजाब से जुड़े रैकेट्स पर कड़ा प्रहार किया गया।
आर्थिक स्तर पर कार्रवाई—संपत्ति कुर्की में दोगुनी तेजी
तस्करों की वित्तीय क्षमता को खत्म करने के लिए संपत्ति अटैचमेंट की कार्रवाई में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। पहली अवधि के 15 मामलों की तुलना में दूसरी अवधि में 27 मामलों में कुर्की प्रक्रिया शुरू की गई। यह वृद्धि बताती है कि पुलिस अब केवल गिरफ्तारियों तक सीमित नहीं, बल्कि अपराधियों की आर्थिक रीढ़ तोड़ने के मॉडल पर कार्य कर रही है।
फार्मास्यूटिकल ड्रग्स के दुरुपयोग पर कड़ा प्रहार—23 मेडिकल स्टोर सील
अभियान के दौरान व्यापक निरीक्षण में तीनों जिलों में 23 मेडिकल स्टोर सील किए गए, जबकि पिछली अवधि में केवल तीन स्टोर ही सील किए गए थे। यह बढ़ोतरी दर्शाती है कि पुलिस ने लाइसेंसी चैनलों के माध्यम से होने वाली अवैध दवाओं की सप्लाई पर भी सख्त नकेल कसी है, जिससे कोडीन और ट्रामाडोल आधारित दवा तस्करी को बड़ा झटका लगा।
हिस्ट्रीशीट खुलने में तीन गुना बढ़ोतरी—दीर्घकालिक सतर्कता कायम
अभियान के दौरान 36 हिस्ट्रीशीट खोली गईं, जबकि पहले की अवधि में यह संख्या 12 थी। यह दर्शाता है कि पुलिस अब तस्करों की गतिविधियों की दीर्घकालिक निगरानी, उनके बैंकिंग पैटर्न, ट्रैवल, मोबाइल डेटा और नेटवर्क संबंधों पर लगातार नज़र बनाए हुए है।
नशा पीड़ितों की पहचान—375 अधिक युवाओं को उपचार की राह पर लाया गया
दूसरी अवधि में 1138 नशा पीड़ितों को चिन्हित कर उपचार के लिए मार्गदर्शन दिया गया, जबकि पिछली अवधि में यह संख्या 763 थी। यह 49% वृद्धि साबित करती है कि पुलिस का यह अभियान केवल दमनात्मक नहीं, बल्कि जन-कल्याण आधारित भी था, जिसमें समाज को नशामुक्त करने का व्यापक दृष्टिकोण अपनाया गया।
नई रणनीति का कुल प्रभाव—ड्रग नेटवर्क जड़ से हिला, समाज को सुरक्षित दिशा
दोनों अवधियों की तुलना स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि 16 अक्तूबर से लागू की गई नई “इंटेलिजेंस-ड्रिवन, नेटवर्क-क्रशिंग और मल्टी-डिपार्टमेंटल” रणनीति ने नशा तस्करी के पूरे ढांचे को तहस-नहस कर दिया। बढ़े हुए मामले, अधिक गिरफ्तारियाँ, सप्लायरों की पहचान, बढ़ी हुई बरामदगी, आर्थिक प्रहार, मेडिकल स्टोरों की सीलिंग और पीड़ितों की बढ़ती सहायता—ये सब मिलकर एक ही संदेश देते हैं कि हरियाणा पुलिस का यह अभियान नशा तस्करी के खिलाफ युद्ध का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ है। पुलिस की प्राथमिकता अब एक सुरक्षित, स्वस्थ और नशामुक्त हरियाणा का निर्माण है, और इस दिशा में यह अभियान एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
DGP ओ.पी. सिंह ने कहा, “हमने पुलिस कार्रवाई को और सुदृढ करते हुए सिर्फ नशा करने वालों पर नहीं, बल्कि पूरे ड्रग सप्लाई नेटवर्क पर सीधा प्रहार किया है। यह लड़ाई सुरक्षा, स्वास्थ्य और समाज की रक्षा की लड़ाई है। हमारा प्रमुख लक्ष्य नशा पीड़ितों को उपचार और पुनर्वास की राह पर लाना है। हम हरियाणा के जज़्बे से भरे बॉर्डर ज़िलों को नशे की मार से पूरी तरह मुक्त क्षेत्रों में बदलने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”