कैंसर की सुनामी की ओर भारत? 2026 में 16 लाख के करीब पहुंच सकते हैं नए मामले, जाने डराने वाली रिपोर्ट
World Cancer Day: आज पूरा विश्व ‘विश्व कैंसर दिवस’ मना रहा है, जिसकी इस वर्ष की थीम “United by Unique” रखी गई है। लेकिन इस जागरूकता दिवस के बीच जो आंकड़े सामने आ रहे हैं, वे डराने वाले हैं। ताजा रिपोर्ट्स और ICMR (भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद) के अनुमानों के मुताबिक, भारत में कैंसर एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट का रूप ले रहा है।
- 2026 के डराने वाले आंकड़े
नए मामलों में उछाल: अनुमान है कि 2026 में भारत में कैंसर के नए मामलों की संख्या 16 लाख (1.6 million) के करीब पहुंच जाएगी। 2022 में यह आंकड़ा लगभग 14.6 लाख था।
हर 9 में से 1 भारतीय को खतरा: हालिया डेटा बताता है कि हर 9 में से 1 भारतीय को अपने जीवनकाल में कैंसर होने की संभावना है।
मौत का आंकड़ा: भारत में कैंसर का ‘मोर्टालिटी-टू-इंसिडेंस’ रेशियो (MIR) लगभग 64.4% है, जो विकसित देशों की तुलना में काफी अधिक है। इसका मतलब है कि देरी से पता चलने के कारण इलाज के बावजूद मृत्यु दर अधिक है।
- कौन से कैंसर हैं सबसे ज्यादा घातक?
भारत में पुरुषों और महिलाओं में अलग-अलग तरह के कैंसर का प्रभाव देखा जा रहा है:
- पुरुष: फेफड़े (Lung), मुंह (Oral) और प्रोस्टेट कैंसर के मामले सबसे अधिक हैं।
- महिलाएं: ब्रेस्ट कैंसर सबसे ऊपर है, उसके बाद सर्वाइकल (Cervical) कैंसर का नंबर आता है।
- युवाओं में खतरा: चौंकाने वाली बात यह है कि 50 वर्ष से कम उम्र के लोगों में भी अब कैंसर तेजी से बढ़ रहा है। दिल्ली जैसे महानगरों में फेफड़ों के कैंसर के 70% मरीज ऐसे हैं जिन्होंने कभी धूम्रपान नहीं किया, जिसका मुख्य कारण प्रदूषण है।
- बजट 2026: इलाज में राहत की उम्मीद
हाल ही में पेश हुए केंद्रीय बजट 2026-27 में कैंसर रोगियों के लिए बड़ी राहत दी गई है:
- कैंसर की 17 जीवन रक्षक दवाओं पर सीमा शुल्क (Customs Duty) खत्म कर दी गई है।
- देश में बायोफार्मा मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि कीमोथेरेपी और अन्य इलाज सस्ते हो सकें।
- WHO की चेतावनी: 40% मामले रोके जा सकते हैं
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 40% कैंसर के मामलों से बचा जा सकता है यदि हम अपनी जीवनशैली में बदलाव करें:
तंबाकू का त्याग: कैंसर के 40% मामलों का सीधा संबंध तंबाकू और धूम्रपान से है।
प्रदूषण और खानपान: अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड और वायु प्रदूषण नए साइलेंट किलर बनकर उभरे हैं।
वैक्सीनेशन: सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए HPV वैक्सीन को अब प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ा जा रहा है।