हरियाणा वक्फ बोर्ड विवाद: हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा हलफनामा, विरोधाभासी रुख पर सख्त टिप्पणी !

Haryana Waqf Board controversy: हरियाणा वक्फ बोर्ड के गठन को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के विरोधाभासी रुख पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह हलफनामा दाखिल कर स्पष्ट करे कि 12 नवंबर 2025 को अदालत के […]
Jaspreet Singh
By : Updated On: 13 Mar 2026 17:31:PM
हरियाणा वक्फ बोर्ड विवाद: हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा हलफनामा, विरोधाभासी रुख पर सख्त टिप्पणी !

Haryana Waqf Board controversy: हरियाणा वक्फ बोर्ड के गठन को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के विरोधाभासी रुख पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह हलफनामा दाखिल कर स्पष्ट करे कि 12 नवंबर 2025 को अदालत के समक्ष दिया गया बयान किस अधिकारी के निर्देश पर दिया गया था।

मामले की शुरुआत वर्ष 2020 में हुई थी।

6 मार्च 2020 को हरियाणा सरकार ने अधिसूचना जारी कर हरियाणा वक्फ बोर्ड में आठ सदस्यों को नामित किया था।

इसके बाद 12 मार्च 2020 को अधिवक्ता मोहम्मद अरशद ने इस अधिसूचना को चुनौती देते हुए सीडब्ल्यूपी नंबर 6681 ऑफ 2020 के माध्यम से पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। प्रारंभिक सुनवाई में ही हाईकोर्ट ने 6 मार्च 2020 की अधिसूचना को प्रभावी होने से रोकते हुए उसे एबeyance में रखने का आदेश दिया। बाद में 12 अगस्त 2021 को हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए पूरी अधिसूचना को रद्द (quash) कर दिया और राज्य सरकार को कानून के अनुसार नया वक्फ बोर्ड गठित करने का निर्देश दिया।

इसके बाद 26 अगस्त 2021 को हरियाणा सरकार ने वक्फ अधिनियम, 1995 की धारा 99 के तहत पूर्व विधायक चौधरी जाकिर हुसैन को हरियाणा वक्फ बोर्ड का प्रशासक (Administrator) नियुक्त कर दिया। यह व्यवस्था अस्थायी रूप से तब तक के लिए की गई थी जब तक नया वक्फ बोर्ड गठित नहीं हो जाता। हालांकि, तब से लेकर अब तक वही प्रशासक बोर्ड के कार्यों का संचालन कर रहे हैं।

इस बीच सरकार ने 6 सितंबर 2024 को एक नई अधिसूचना जारी कर कुछ सदस्यों को वक्फ बोर्ड में नामित किया। इस अधिसूचना को भी अधिवक्ता मोहम्मद अरशद ने हाईकोर्ट में चुनौती दी। इस पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने 23 सितंबर 2024 को इस अधिसूचना को भी एबeyance में रखने का आदेश दे दिया।

इसी दौरान 12 सितंबर 2024 को हरियाणा विधानसभा भंग हो गई, जिसके कारण विधायक श्रेणी से नामित सदस्य की सदस्यता स्वतः समाप्त हो गई।


मामले में एक अहम मोड़ 12 नवंबर 2025 को आया, जब इस विवाद से जुड़ी कई याचिकाओं की सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार ने अदालत को निर्देश लेकर बताया कि तीन महीने के भीतर नये कानून के अनुसार वक्फ बोर्ड गठित कर दिया जाएगा। सभी पक्षों की सहमति के आधार पर हाईकोर्ट ने इस बयान को रिकॉर्ड करते हुए आदेश पारित कर दिया।

हालांकि इसके बाद जनवरी 2026 में राज्य सरकार ने उसी आदेश में संशोधन और स्पष्टीकरण के लिए आवेदन दाखिल कर दिया। सरकार का कहना था कि 6 सितंबर 2024 को ही वक्फ बोर्ड गठित किया जा चुका था और केवल चेयरमैन का चुनाव बाकी है।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने इस दलील पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि राज्य सरकार दो अलग-अलग और विरोधाभासी बातें कर रही है एक ओर वह बोर्ड के पहले से गठित होने की बात कह रही है, जबकि दूसरी ओर 2021 से प्रशासक के माध्यम से ही बोर्ड का संचालन जारी है।

सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि अप्रैल 2025 में संसद ने वक्फ अधिनियम, 1995 में संशोधन किया, जिससे वक्फ बोर्ड की संरचना से जुड़े प्रावधानों में महत्वपूर्ण बदलाव हुआ।

संशोधन के तहत जो नई धारा 14(1F) जोड़ी गई है, उसके अनुसार संशोधन लागू होने के बाद केवल निर्वाचित सदस्य ही अपने पद पर बने रह सकते हैं।
चूंकि 6 सितंबर 2024 की अधिसूचना के तहत सभी सदस्य केवल नामित थे और कोई भी निर्वाचित सदस्य नहीं था, इसलिए संशोधन लागू होने के बाद उस अधिसूचना का कानूनी आधार समाप्त हो गया। इस वजह से राज्य सरकार का यह तर्क कि वक्फ बोर्ड पहले से गठित है, कानूनी रूप से टिकाऊ नहीं माना जा रहा।

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह हलफनामा दाखिल कर स्पष्ट करे कि 12 नवंबर 2025 को अदालत में दिया गया बयान किस अधिकारी के निर्देश पर दिया गया था। ताकि उस अधिकारी पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए, अदालत ने यह भी संकेत दिया कि यदि तय समय के भीतर हलफनामा दाखिल नहीं किया गया तो कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।

मामले की अगली सुनवाई 24 अप्रैल 2026 को निर्धारित की गई है, जिस दिन राज्य सरकार को अपना हलफनामा अदालत के समक्ष पेश करना होगा।

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