गर्मी की विभीषिका से बच्चों को बचाने के लिए ग्रीष्मकालीन अवकाश पहले कर दिए गए : निर्मल दहिया
भिवानी, 22 मई : इन दिनों पड़ रही प्रचंड गर्मी को देखते हुए एक जून से होने वाली गर्मी की छुट्टियां अबकी बार 25 मई से कर दी गई है। इसके लिए हरियाणा विद्यालय शिक्षा निदेशालय पंचकूला द्वारा राज्य के सभी सरकारी एवं निजी विद्यालयों में ग्रीष्मकालीन अवकाश घोषित कर दिए गए हैं। इस संबंध में भिवानी की जिला शिक्षा अधिकारी निर्मल दहिया ने बताया कि भीषण गर्मी और हीट वेव को देखते हुए राज्य सरकार के निर्देशानुसार 25 मई से 30 जून तक सभी विद्यालय बंद रहेंगे।
भिवानी जिला शिक्षा अधिकारी निर्मल दहिया ने बताया कि एक जुलाई से विद्यालय पुन: निर्धारित समयानुसार खुलेंगे। जिला शिक्षा अधिकारी ने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों, विद्यालय मुखियाओं तथा निजी स्कूल संचालकों को निर्देश जारी करते हुए कहा कि ग्रीष्मकालीन अवकाश के आदेशों की कड़ाई से पालना सुनिश्चित की जाए।
निर्मल दहिया ने कहा कि विद्यालय प्रशासन विद्यार्थियों एवं अभिभावकों को अवकाश की जानकारी सूचना-पट्ट, एसएमएस, व्हाट्सएप संदेश तथा अन्य संचार माध्यमों के जरिए अवश्य उपलब्ध करवाएं। साथ ही ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान गृहकार्य, एसएमसी बैठक, पीटीएम एवं अन्य आवश्यक गतिविधियों के संबंध में समयानुसार उचित कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार के आदेश उल्लंघन की सूचना तुरंत उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी। जिला शिक्षा अधिकारी ने सभी विद्यालयों से विद्यार्थियों के स्वास्थ्य एवं सुरक्षा को प्राथमिकता देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि गर्मी की विभीषिका से बच्चों को बचाने के लिए ग्रीष्मकालीन अवकाश पहले कर दिए गए है।
उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि उन्हे अवकाश का एक सप्ताह अधिक मिल गया है, ऐसे में उन्हे चाहिए कि वे इसका लाभ उठाते हुए अपना पाठन कार्य सुचारू रूप से जारी रखे।
वही मोबाईल के बढ़ते प्रयोग पर जिला शिक्षा अधिकारी ने कहा कि मोबाईल आज के दिन एक जरूरत बना हुआ है। लेकिन इसके बावजूद भी मोबाईल के प्रयोग को इतना बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए कि इसे कक्षा में लेकर जाकर उसके द्वारा ही पढ़ाया जाए, ताकि अध्यापक की प्रासंगिकता कम हो या खत्म हो।
उन्होंने कहा कि अध्यापक को चाहिए कि वो विद्यार्थी को प्रत्यक्ष व नैतिक रूप से पढ़ाए, क्योंकि विद्यार्थी को अपने अध्यापक की प्रत्यक्ष रूप से जरूरत है तथा मोबाईल जैसी पठन-पाठन सामग्री द्वितीय स्थान पर आती है।