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अब पढ़ाई के साथ 3200 विशेष बच्चों को घर बैठे मिलेगी थेरेपी और स्कॉलरशिप: चंडीगढ़ प्रशासन का बड़ा फैसला

शिक्षा मंत्रालय के प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड (PAB) ने वर्ष 2026-27 के लिए मंजूर किया ₹2.92 करोड़ का बजट ‘जीरो रिजेक्शन पॉलिसी’ के तहत गंभीर रूप से दिव्यांग बच्चों को घर पर ही दी जाएगी शिक्षा, रिसोर्स रूम होंगे हाईटेक चंडीगढ़: चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले करीब 3,200 विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CWSN) के […]
Nishant Malyan
By : Published: 13 Jul 2026 09:00:AM
अब पढ़ाई के साथ 3200 विशेष बच्चों को घर बैठे मिलेगी थेरेपी और स्कॉलरशिप: चंडीगढ़ प्रशासन का बड़ा फैसला

शिक्षा मंत्रालय के प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड (PAB) ने वर्ष 2026-27 के लिए मंजूर किया ₹2.92 करोड़ का बजट

‘जीरो रिजेक्शन पॉलिसी’ के तहत गंभीर रूप से दिव्यांग बच्चों को घर पर ही दी जाएगी शिक्षा, रिसोर्स रूम होंगे हाईटेक

चंडीगढ़:

चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले करीब 3,200 विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CWSN) के उज्ज्वल भविष्य के लिए चंडीगढ़ प्रशासन ने समावेशी शिक्षा का दायरा बढ़ा दिया है। अब इन बच्चों का विकास केवल किताबों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि प्रशासन उनकी सेहत, थेरेपी, सहायक उपकरण और घर पर ही शिक्षा जैसी तमाम सुविधाएं उपलब्ध कराएगा।

शिक्षा मंत्रालय की प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड (पैब) की वर्ष 2026-27 की रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरी योजना के लिए ₹2.92 करोड़ का बजट मंजूर किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी विशेष बच्चा आर्थिक, शारीरिक या सामाजिक कारणों से शिक्षा से वंचित न रहे।

मेडिकल कैंप और थेरेपी के लिए विशेष बजट

बच्चों की स्वास्थ्य जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रशासन ने निम्नलिखित कदम उठाए हैं:

  • मेडिकल असेसमेंट कैंप: शहर के सभी 20 क्लस्टरों में हर साल स्वास्थ्य और समाज कल्याण विभाग के सहयोग से विशेष पहचान और मेडिकल कैंप लगाए जाएंगे। इसके लिए हर क्लस्टर को ₹10,000 का बजट दिया गया है।
  • थेरेपी सुविधाएं: बच्चों को उनकी जरूरत के अनुसार थेरेपी देने के लिए सभी 20 क्लस्टरों के लिए कुल ₹4 लाख (यानी ₹20,000 प्रति क्लस्टर) का बजट मंजूर हुआ है।

‘जीरो रिजेक्शन पॉलिसी’: घर पहुंचेंगे टीचर

जो बच्चे गंभीर दिव्यांगता के कारण स्कूल आने में असमर्थ हैं, उनके लिए होम बेस्ड एजुकेशन का प्रावधान किया गया है:

  • प्राथमिक स्तर: 122 बच्चों को घर पर शिक्षा देने के लिए ₹4.27 लाख खर्च किए जाएंगे।
  • माध्यमिक स्तर: 30 बच्चों को उनके घर पर ही शिक्षा की सुविधा दी जाएगी।

3 सरकारी स्कूलों के रिसोर्स रूम होंगे हाईटेक

विशेष बच्चों की सीखने की क्षमता को आधुनिक उपकरणों के जरिए बेहतर बनाने के लिए ₹6 लाख की लागत से तीन सरकारी स्कूलों के रिसोर्स रूम को हाईटेक किया जाएगा:

  1. जीएमएचएस (GMHS), सेक्टर-12
  2. जीएमएचएस (GMHS), धनास-दो
  3. जीएमएसएसएस (GMSSS), सेक्टर-33

इसके अलावा, 53 दृष्टिबाधित बच्चों को ब्रेल स्टेशनरी उपलब्ध कराई जाएगी और 75 बच्चों को आवश्यक सहायक उपकरण (हियरिंग एड, व्हीलचेयर आदि) दिए जाएंगे।

स्कॉलरशिप, भत्ता और चाइल्ड केयर अटेंडेंट

विशेष बच्चों और उनके परिवारों को आर्थिक रूप से सहयोग देने के लिए बजट में कई महत्वपूर्ण प्रावधान हैं:

  • गर्ल स्टूडेंट्स के लिए स्कॉलरशिप: प्राथमिक स्तर की 313 और माध्यमिक स्तर की 156 छात्राओं को ₹200 प्रति माह की दर से 10 महीने तक स्कॉलरशिप मिलेगी। यह राशि सीधे डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए उनके बैंक खातों में जाएगी।
  • एस्कॉर्ट व परिवहन भत्ता: प्राथमिक स्तर के 594 बच्चों को एस्कॉर्ट भत्ते के लिए ₹35.64 लाख और 58 बच्चों को परिवहन भत्ते के लिए ₹3.48 लाख दिए जाएंगे। माध्यमिक स्तर पर भी 259 बच्चों को एस्कॉर्ट सुविधा मिलेगी।
  • चाइल्ड केयर अटेंडेंट: स्कूलों में इन बच्चों की देखरेख और सहायता के लिए 10 अटेंडेंट रखी जाएंगी, जिन्हें ₹11,000 प्रति माह मानदेय (Salary) दिया जाएगा।

कुल ₹2.92 करोड़ का बजट वितरण (खर्च का ब्योरा):

मद (Category)आवंटित बजट (रू. में)
स्पेशल एजुकेटर्स का वेतन (प्रारंभिक स्तर पर 23 एजुकेटर्स)₹154.08 लाख
कुल एस्कॉर्ट भत्ता (बच्चों को स्कूल लाने-ले जाने के लिए)₹51.18 लाख
ब्रेल स्टेशनरी व सहायक उपकरण₹5.63 लाख
विश्व दिव्यांग दिवस (सांस्कृतिक और खेल प्रतियोगिताएं)₹4.00 लाख

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