राम मंदिर चढ़ावा चोरी, टिन्नू यादव का नाम लेते ही चेकिंग से मिल जाती थी छूट, SIT के सामने बैंक कैशियर ने खोले कई बड़े राज
संदेह से बचने के लिए शातिर अपराधियों की तरह शांत रहकर काम करते थे आरोपी गणनाकर्मी
शुरुआत में की गई कड़ी सुरक्षा जांच बाद में पड़ गई थी ढीली; बाथरूम में छिपाई जाती थी चोरी की नकदी
अयोध्या (05 जुलाई, 2026):
अयोध्या में रामलला के चढ़ावे में लगातार हो रही चोरी के मामले में एसआईटी (SIT) की तफ्तीश जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, नित नए और चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। जांच के दौरान बैंक कैशियर और पकड़े गए आरोपियों ने सुरक्षा व्यवस्था और चोरी के अनूठे तौर-तरीकों को लेकर कई बड़े राज उगले हैं। पूछताछ में सामने आया है कि इस बड़ी चोरी को अंजाम देने वाले गणनाकर्मी (नोटों की गिनती करने वाले) किसी पेशेवर और अभ्यस्त अपराधी की तरह बेहद शातिर दिमाग से काम करते थे।
टिन्नू यादव के नाम पर मिलती थी ‘वीआईपी’ छूट
एसआईटी को बैंक कैशियर और अन्य सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, राम मंदिर परिसर में तैनात सुरक्षाकर्मी शुरुआत में तो बेहद कड़ी जांच करते थे, लेकिन बाद में इस वीआईपी सुरक्षा व्यवस्था को जानबूझकर ढीला कर दिया गया। पूछताछ में यह बात सामने आई है कि मंदिर परिसर के भीतर और चेकिंग पॉइंट पर ‘टिन्नू यादव’ का नाम लेते ही सुरक्षाकर्मी चेकिंग में भारी छूट दे देते थे। टिन्नू यादव के नाम का इस्तेमाल एक ‘कोड वर्ड’ या रसूख के तौर पर किया जाता था, जिसकी आड़ में सुरक्षाकर्मी बिना सघन चेकिंग किए आरोपियों को अंदर-बाहर आने-जाने की इजाजत दे देते थे। इसी ढील का फायदा उठाकर चढ़ावे की भारी नकदी बाहर निकाली जाती रही।
शक से बचने के लिए अजनबियों की तरह रहते थे आरोपी
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि गोपनीय कक्ष में नोटों की गिनती (गणना) करने वाले आरोपी आपस में इस तरह व्यवहार करते थे जैसे वे एक-दूसरे को जानते तक न हों।
- चुपचाप काम करना: गणना के समय कोई भी कर्मी न तो किसी की तरफ देखता था और न ही आपस में बातचीत करता था।
- कोई घनिष्ठता नहीं दिखाना: वे जानबूझकर शांत रहते थे ताकि वहां मौजूद सीसीटीवी (CCTV) कैमरों या अधिकारियों को उनकी घनिष्ठता पर कोई शक न हो।
- मौज-मस्ती सिर्फ पार्टियों में: वे केवल तभी खुलकर बात करते थे या मौज-मस्ती करते थे जब वे परिसर से बाहर कहीं गुप्त रूप से पार्टी कर रहे होते थे।
बाथरूम में छिपाई जाती थी नकदी
इस रैकेट का काम करने का तरीका पूरी तरह से प्री-प्लान्ड (पहले से तय) था। गणना कक्ष से नजर बचाकर नोटों की गड्डियों या चुराए गए कैश को सबसे पहले परिसर के भीतर स्थित बाथरूम या अन्य सुनसान कोनों में छिपा दिया जाता था। इसके बाद, मौका देखकर और सुरक्षाकर्मियों की मिलीभगत या ‘टिन्नू यादव’ के नाम की छूट का फायदा उठाकर उस नकदी को बैगों में भरकर सुरक्षित बाहर निकाल लिया जाता था। फिलहाल, एसआईटी इस बात की गहराई से जांच कर रही है कि टिन्नू यादव कौन है और सुरक्षा तंत्र में उसकी पैठ कहां तक थी, ताकि इस बड़ी साजिश के मास्टरमाइंड तक पहुंचा जा सके।