इसरो आज लॉन्च करेगा देश का सबसे भारी कम्युनिकेशन सैटेलाइट ‘बाहुबली’, जानें- इसके बारे में सबकुछ
ISRO Mission CMS-03 Launch: इसरो आज सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से संचार उपग्रह यानी कम्युनिकेशन सैटेलाइन को लॉन्च करने जा रहा है, जिसका सबसे बड़ा फायदा नौसेना का होगा। मिशन शाम करीब साढ़े 5 बजे लॉन्च होगा और लॉन्चिंग के लिए जरूरी सभी स्थितियां अभी तक अनुकूल हैं।
भारत का बाहुबली प्रक्षेपण यान एलवीएम-3 आज अपनी पांचवीं परिचालन उड़ान भरने वाला है। इस बार वह धरती से भेजने जाने वाला सबसे भारी संचार उपग्रह सीएमएस-03 को अंतरिक्ष में लेकर जाएगा। भारतीय नौसेना का जीसैट 7R (सीएमएस-03) अब तक का सबसे उन्नत संचार उपग्रह होगा। यह मल्टी बैंड संचार उपग्रह पूरे उपमहाद्वीप के विशाल समुद्री क्षेत्र में संचार नेटवर्क को मजबूत करेगा और भारतीय नौसेना के लिए पैनी नजर बनाए रखना संभव बनाएगा।
अंतरिक्ष एजेंसी ISRO ने बताया कि लगभग 4,410 किलोग्राम वजन वाला यह उपग्रह भारत की धरती से भू-समकालिक स्थानांतरण कक्षा (जीटीओ) में प्रक्षेपित किया जाने वाला सबसे भारी उपग्रह होगा। यह उपग्रह LVM3-M5 रॉकेट के जरिये प्रक्षेपित किया जाएगा, जिसे इसकी भारी भारोत्तोलन क्षमता के लिए ‘बाहुबली’ नाम दिया गया है।
बाहुबली से किया जाएगा प्रक्षेपण
बेंगलुरु में स्थित अंतरिक्ष एजेंसी ISRO ने बताया कि प्रक्षेपण यान को पूरी तरह से तैयार करके अंतरिक्ष यान के साथ एकीकृत कर दिया गया है तथा इसे प्रक्षेपण-पूर्व कार्यों के लिए यहां दूसरे प्रक्षेपण स्थल पर ले जाया गया है। ISRO ने बताया कि 4,000 किलोग्राम तक भारी पेलोड ले जाने की क्षमता के कारण ‘बाहुबली’ नाम से जाना जाने वाला 43.5 मीटर लंबा यह यान रविवार को शाम 5 बजकर 26 मिनट पर प्रक्षेपित होगा। उसने बताया कि LVM3 (प्रक्षेपण यान मार्क-3) ISRO का भारी वजन वहन करने वाला नया प्रक्षेपण यान है और इसका उपयोग 4,000 किलोग्राम के अंतरिक्ष यान को लागत प्रभावी तरीके से जीटीओ में स्थापित करने के लिए किया जाएगा।
तीन चरणों में होगी लॉन्चिंग
हालांकि यह दावा किया जा रहा है कि उपग्रह का इस्तेमाल सैन्य निगरानी के लिए भी किया जाएगा, लेकिन इस मामले पर इसरो की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। दो ठोस मोटर ‘स्ट्रैप-ऑन’ (S200), एक द्रव प्रणोदक कोर चरण (L110) और एक क्रायोजेनिक चरण (C25) वाला यह तीन चरणीय प्रक्षेपण यान ISRO को जीटीओ में 4,000 किलोग्राम तक वजन वाले भारी संचार उपग्रहों को प्रक्षेपित करने में पूर्ण आत्मनिर्भरता प्रदान करता है। LVM3- को इसरो के वैज्ञानिक भू-समकालिक उपग्रह प्रक्षेपण यान (जीएसएलवी) MK3 भी कहते हैं।
इसरो की यह पांचवी अभियानगत उड़ान
इसरो ने कहा कि LVM3-M5 पांचवीं अभियानगत उड़ान है। इससे पहले, ISRO ने पांच दिसंबर, 2018 को एरियन-5 VA-246 रॉकेट के जरिए फ्रेंच गुयाना के कौरू प्रक्षेपण केंद्र से अपने सबसे भारी संचार उपग्रह जीसैट-11 को प्रक्षेपित किया था। लगभग 5,854 किलोग्राम वजनी जीसैट-11 इसरो द्वारा निर्मित सबसे भारी उपग्रह है।
LVM-3 से ही लॉन्च किया गया था चंद्रयान-3
ISRO ने कहा कि रविवार के मिशन का उद्देश्य यह है कि बहु-बैंड संचार उपग्रह CMS-03 भारतीय भूभाग सहित एक विस्तृत समुद्री क्षेत्र में सेवाएं प्रदान करेगा। LVM-3 रॉकेट ने इससे पहले चंद्रयान-3 का सफल प्रक्षेपण किया था, जिसके जरिए भारत 2023 में चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास सफलतापूर्वक उतरने वाला पहला देश बन गया। LVM3 यान अपने शक्तिशाली क्रायोजेनिक चरण के साथ 4,000 किलोग्राम वजन का पेलोड जीटीओ तक तथा 8,000 किलोग्राम वजन का पेलोड पृथ्वी की निचली कक्षा तक ले जाने में सक्षम है।
नेवी को कैसे होगा फायदा
जीसैट-7आर उपग्रह से मल्टी-बैंड कम्युनिकेशन सपोर्ट मिलेगा जिससे नौसेना के जहाजों, पनडुब्बियों, विमानों और समुद्री संचालन केंद्रों के बीच सुरक्षित और निर्बाध संपर्क बना रहेगा। इससे भारतीय महासागर क्षेत्र में व्यापक टेलीकम्युनिकेशन कवरेज संचालित करने में मदद मिलेगी। इस उपलब्धि का एक बड़ा लाभ यह है कि इससे नौसेना की समुद्री डोमेन जागरूकता और रणनीतिक क्षमताओं में वृद्धि होगी।
विशेषज्ञ इसे नौसेना की परिचालन क्षमता में नई छलांग के तौर पर भी देख रहे हैं। दरअसल जीसैट-7आर के संचालन में आने से भारतीय नौसेना की नेटवर्क-सेंट्रिक ऑपरेशंस को अत्यधिक मजबूती मिलेगी। इससे दूरस्थ समुद्री सीमाओं पर भी रीयल-टाइम डेटा ट्रांसमिशन संभव होगा। यही नहीं नौसेना की निगरानी और समन्वय को भी मजबूती मिलेगी। इसलिए यह उपग्रह नौसेना की ‘डिजिटल नौसेना’ की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण पहल है।