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नीट परीक्षा रद्द होने से 24 लाख विद्यार्थियों का भविष्य संकट में, दोषियों को मिले कड़ी सजा : अनुराग शर्मा

NEET Paper Leak Case: नीट परीक्षा रद्द होने के मामले को लेकर धर्मशाला में राज्यसभा सांसद अनुराग शर्मा ने केंद्र सरकार और परीक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि यह देश के लाखों विद्यार्थियों और उनके परिवारों के साथ बड़ा अन्याय है। उन्होंने कहा कि लगभग 24 […]
Khushi
By : Updated On: 12 May 2026 18:21:PM
नीट परीक्षा रद्द होने से 24 लाख विद्यार्थियों का भविष्य संकट में, दोषियों को मिले कड़ी सजा : अनुराग शर्मा

NEET Paper Leak Case: नीट परीक्षा रद्द होने के मामले को लेकर धर्मशाला में राज्यसभा सांसद अनुराग शर्मा ने केंद्र सरकार और परीक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि यह देश के लाखों विद्यार्थियों और उनके परिवारों के साथ बड़ा अन्याय है। उन्होंने कहा कि लगभग 24 लाख विद्यार्थियों ने नीट परीक्षा के लिए दिन-रात मेहनत की, कई छात्रों ने ड्रॉप लेकर तैयारी की, तो कई परिवारों ने कर्ज लेकर बच्चों को कोचिंग दिलाई।

उन्होंने कहा कि विद्यार्थी घरों से दूर रहकर कठिन परिस्थितियों में तैयारी करते हैं और परीक्षा के बाद जब उन्हें राहत मिलती है, तभी पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने जैसी खबरें सामने आ जाती हैं। इससे बच्चों पर मानसिक दबाव बढ़ता है और अभिभावक भी अवसाद की स्थिति में पहुंच जाते हैं। अनुराग शर्मा ने कहा कि किसी भी राजनीतिक संरक्षण के बिना पेपर लीक जैसी घटनाएं संभव नहीं हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र में भाजपा सरकार है और प्रदेश में भाजपा सरकार के समय भी पुलिस भर्ती परीक्षा का पेपर लीक हुआ था। ऐसे मामलों से जनता का अधिकारियों और व्यवस्था पर भरोसा कमजोर हो रहा है।

उन्होंने मांग उठाई कि सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों की निगरानी में एक विशेष समिति गठित की जाए, जो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करे तथा दोषियों को कठोर से कठोर सजा दी जाए। उन्होंने कहा कि इस समय विद्यार्थी मानसिक प्रताड़ना से गुजर रहे हैं और कांग्रेस पार्टी विद्यार्थियों व उनके परिवारों के साथ मजबूती से खड़ी है।

अनुराग शर्मा ने बताया कि पूरे देश में करीब 24 लाख बच्चों ने नीट परीक्षा दी थी, जिनमें हिमाचल प्रदेश के लगभग 32 हजार विद्यार्थी शामिल थे। उन्होंने कहा कि प्रदेश के सबसे बड़े जिला कांगड़ा में 8 से 9 हजार बच्चों ने परीक्षा दी, जबकि धर्मशाला में करीब 2 हजार विद्यार्थियों ने परीक्षा दी थी।

उन्होंने कहा कि धर्मशाला एक बड़ा एजुकेशनल हब बन चुका है और उनके अपने रिश्तेदारों के बच्चे भी परीक्षा रद्द होने के बाद बेहद परेशान और भावुक हैं। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को विद्यार्थियों के साथ हुई ऐतिहासिक अन्यायपूर्ण घटना बताते हुए इसकी कड़े शब्दों में निंदा की।

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