भारत-पाकिस्तान बंटवारे की दर्द भरी दास्तां, अंबाला के टंडन बोले- सारी उम्र गुजार दी जन्नत उजाड़ने में, क्यों मारने के बाद जन्नत मिले !
India-Pakistan Partition: दोनों देशों का विभाजन अपने साथ बड़ी त्रासदी भी लेकर आया। हर तरफ खून से लथपथ लाश ही लाश दिखाई पड़ रही थी।
Painful Story of India-Pakistan Partition: भारत आज 79वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है, लेकिन भारत-पाकिस्तान विभाजन के समय के मंजर याद करके लोगों के आज भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं। अंबाला कैंट की ट्रिब्यून कॉलोनी निवासी 87 साल के MS टंडन भी सन 1948 में पाकिस्तान से आकर भारत बसे थे। टंडन ने बंटवारे की दास्तां साझा कर दर्द सांझा किया।
MS टंडन ने बताया कि 15 अगस्त 1947 को भारत अंग्रेजों की गुलामी से आजाद हुआ तो एक अलग मुल्क के रूप में पाकिस्तान भी अस्तित्व में आया। दोनों देशों का विभाजन अपने साथ बड़ी त्रासदी भी लेकर आया। हिंदु-मुस्लिम एक-दूसरे के खून के प्यासे थे। हर तरफ खून से लथपथ लाश ही लाश दिखाई पड़ रही थी।
टंडन ने बताया कि उस समय मैं 7-8 साल का था। पाकिस्तान के कैंपबेलपुर (अटक) में अपने मुस्लिम दोस्तों के साथ स्कूल जाता था। मेरे दोस्त छतरी से छांव करते थे। बंटवारे के वक्त बच्चों के दिलों में नफरत का जहर इस कदर घोल दिया कि सभी एक दूसरे के दुश्मन बना दिए। हालात खराब होने लगे तो वह 1948-49 में पाकिस्तान से निकल आए थे।
पाकिस्तान में दादा का था वाटर मिल
टंडन ने बताया कि मुझे याद है कि मेरे दादा लाला मेहर चंद टंडन का पाकिस्तान में वाटर मिल था। साथ ही 2-3 ट्रक थे, जिनसे वह अपना बिजनेस कर रहे थे। उनके वाटर मिल पर मुस्लिम काम करते थे, जो दिनभर की कमाई उनके दादा को देते थे। जब बंटवारा हुआ तो उन्होंने उगाही किए हुए पैसे देने से इनकार कर दिया। यही नहीं, पाकिस्तान छोड़ने की बात कही। उनके ट्रक भी पाकिस्तान में फंस गए।
पाकिस्तान से सिख ड्राइवर लेकर आया था ट्रक
टंडन ने बताया कि उनके एक ट्रक पर सिख ड्राइवर था। वो ड्राइवर उनका ट्रक पाकिस्तान से निकाल पहले अमृतसर पहुंचा, उसके बाद ढूंढते-ढूंढते जालंधर, लुधियाना और फिर अंबाला पहुंचा। यहां किसी न किसी तरह ड्राइवर ने अंबाला में उनके दादा और पिता को ढूंढ लिया। ट्रक में आए 10-12 कपड़े के थान से अंबाला बाजार में दुकानों के आगे बैठ कपड़ा बेचा। यही नहीं, फड़ी पर आटा भी बेचा। शुरुआत में ऐसे जिंदगी का गुजारा किया।