एसिड अटैक मामलों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, राज्यों को 4 हफ्ते में विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का आदेश

Latest News: एसिड अटैक की बढ़ती घटनाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे चार सप्ताह के भीतर एसिड अटैक मामलों से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करें। इस रिपोर्ट में वर्षवार मामलों की संख्या, अदालतों में उनकी स्थिति, […]
Khushi
By : Updated On: 28 Jan 2026 08:14:AM
एसिड अटैक मामलों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, राज्यों को 4 हफ्ते में विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का आदेश

Latest News: एसिड अटैक की बढ़ती घटनाओं को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे चार सप्ताह के भीतर एसिड अटैक मामलों से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करें। इस रिपोर्ट में वर्षवार मामलों की संख्या, अदालतों में उनकी स्थिति, पीड़ितों के इलाज, खर्च और पुनर्वास से जुड़ी जानकारी शामिल करनी होगी।

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस आर महादेवन और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने राज्यों से रिपोर्ट तलब की है. सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से यह बताने के लिए कहा है कि कितने मामलों में ट्रायल कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई है. राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों को यह जानकारी भी देनी होगी कि ट्रायल कोर्ट स्तर पर कितने मामले निपटाए गए हैं और कितने अभी लंबित हैं.

सीजेआई की अगुवाई वाली बेंच ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को रिपोर्ट दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है. रिपोर्ट में इस बात की भी जानकारी देनी होगी कि एसिड अटैक के कितने मामलों में अपीलीय अदालतों (हाईकोर्ट समेत) में अपील दायर की गई है. सर्वोच्च न्यायालय ने हर पीड़िता का संक्षिप्त विवरण देने के निर्देश भी दिए हैं. इस संक्षिप्त विवरण में पीड़िता की शैक्षणिक योग्यता, रोजगार और वैवाहिक स्थिति की जानकारी भी देनी होगी.

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश की सरकारों को सर्वोच्च न्यायालय में पीड़िता को मिले या मिलने वाले मेडिकल ट्रीटमेंट और उस पर हुए या होने वाले खर्च की जानकारी भी देनी होगी. साथ ही, पीड़ितों के लिए लागू पुनर्वास योजनाओं का विवरण भी देना होगा. सीजेआई की अगुवाई वाली बेंच ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से उन मामलों की जानकारी भी मांगी है, जिनमें पीड़ितों को जबरन एसिड पिलाया गया.

कानून में बदलाव पर विचार का सुझाव

सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने एसिड अटैक को लेकर कानून में बदलाव का भी सुझाव दिया है. जस्टिस सूर्यकांत ने केंद्र सरकार से कहा है कि वह कानून में बदलाव पर विचार करे, ताकि एसिड अटैक करने वालों को असाधारण सजा दी जा सके. सुप्रीम कोर्ट शाहीन मलिक की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रहा है.

शाहीन मलिक खुद भी एक एसिड अटैक सर्वाइवर हैं. वह कानून में दिव्यांग व्यक्तियों की परिभाषा का विस्तार चाहती हैं, ताकि जबरन एसिड पिलाने से जिन पीड़ितों के आंतरिक अंगों को गंभीर और जानलेवा नुकसान हुआ है, उन्हें पर्याप्त मुआवजा, चिकित्सा सुविधा और अन्य राहत मिल सके.

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