पंजाब के साथ-साथ हरियाणा के नौजवानों में भी विदेश जाने का बढ़ता क्रेज़, अमेरिका जाने के लिए डंकी रूट का रूह कंपाने वाला वीडियो
America Deport Haryana Men: अमेरिका की ट्रंप सरकार अवैध रूप से देश में प्रवेश करने वाले युवाओं को डिपोर्ट कर रही है। जनवरी से लेकर अब तक हरियाणा के 658 युवाओं को बेड़ियां पहनाकर वापस भेजा जा चुका है।
Donkey Route to Enter US: हरियाणा के कई नौजवानों को हाल ही में अमेरिका ने डिपोर्ट किया है। इसमें सबसे अधिक नौजवान करनाल के थे। जिस में करनाल के संगोहा गांव का 23 वर्षीय रजत पाल भी था, जो आंखों में बड़े सपने लिए अमेरिका गया था। अमेरिका में सेटल होकर सब दोबारा बना लेगा, यह सोचकर उसने रिस्क तो लिया, लेकिन घर, प्लॉट, दुकान सब बिक गए और ऊपर से बैंक का 10 लाख रुपए का लोन भी सिर पर चढ़ गया।
सैकड़ों मील जंगल और नदियों के रास्तों पर तकलीफें सहते हुए रजत पिछले साल 2 दिसंबर को ‘डंकी रूट’ से अमेरिका में दाखिल हुआ। इस सफर से पहले ही एजेंट की फीस और अन्य खर्चों में मिलाकर उसके 60 लाख रुपए स्वाहा हो चुके थे, लेकिन अमेरिका में घुसते ही वह पकड़ा गया।
10 महीने तक कैंप में यातनाएं झेलने के बाद 29 अगस्त को उसे डिपोर्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। आखिरकार 20 अक्टूबर को उसे बेड़ियों में जकड़कर भारत वापस भेज दिया गया।
यह कहानी सिर्फ रजत की नहीं, बल्कि डिपोर्ट किए गए हरियाणा के 54 युवाओं में से लगभग हर एक की है। अमेरिका की ट्रंप सरकार अवैध रूप से देश में प्रवेश करने वाले युवाओं को डिपोर्ट कर रही है। जनवरी से लेकर अब तक हरियाणा के 658 युवाओं को बेड़ियां पहनाकर वापस भेजा जा चुका है। उनमें से कई अभी भी डरे-सहमे हैं या सामाजिक शर्मिंदगी के कारण कैमरे पर बात करने को तैयार नहीं हैं। हालांकि, उन्होंने डंकी रूट के कुछ वीडियो शेयर किए हैं, जिनमें वह पनामा के खतरनाक जंगलों और नदियों से जा रहे हैं।
खतरों से भरा डंकी रूट, कदम कदम पर होता है ख़तरा
डंकी रूट से अमेरिका जाने के दौरान कभी जंगलों से पैदल गुजरना पड़ा, कभी पानी के रास्ते नावों में, तो कभी गाड़ियों में ठूंसकर ले जाया गया। बीच-बीच में डोंकर्स ने धमकियां दीं कि अगर पैसे नहीं मिले तो अंगुलियां काटकर भेज देंगे। सबसे पहले एजेंट उन्हें दुबई लेकर गए, वहां से उसे सूरीनाम भेजा गया। फिर गाड़ियों में बैठाकर मेक्सिको तक पहुंचाया गया। इसके बाद उसे पनामा के जंगलों से पैदल निकलना पड़ा। रास्ते में न खाना ठीक मिलता था, न पानी। कई बार डोंकर्स ने जान से मारने की धमकी दी और पैसे की मांग की।
पैदल और किश्तियों के सहारे करते सफर
पनामा के जंगलों का रास्ता बेहद खतरनाक होता है। वहां हर कदम पर मौत मंडराती है। जहरीले जीव-जंतु और जंगली जानवर किसी भी वक्त हमला कर सकते हैं। लोग पैदल और किश्तियों के सहारे सफर करते हैं। कई लोग उस रास्ते पर ही बीमार होकर गिर जाते हैं और आगे नहीं बढ़ पाते। जंगलों में कई बार साथियों को मरते देखा। उन्होंने बॉर्डर पार किया, जिसके बाद उसे अमेरिका के एरिजोना कैंप में ले जाया गया। फिर वहां से लॉस एंजेलिस के लुसियाना कैंप भेजा गया। वहां वह करीब 10 महीने तक रहा। न खाने का ठीक इंतजाम था, न पहनने का। एक कंबल दिया जाता, जिससे सर्दी भी नहीं रुकती थी। 29 अगस्त को उसकी डिपोर्ट करने की प्रक्रिया शुरू हुई और 20 अक्टूबर को उसे भारत भेज दिया गया।