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अमेरिका में जान गंवाने वाले सुपनदीप का पार्थिव शरीर पहुंचा गांव शेखूपुरा मंचुरी, नम आंखों से पूरे क्षेत्र ने दी अंतिम विदाई

प्रवासी भारतीयों और सामाजिक संगठनों के सहयोग से कैलिफोर्निया से लाया गया शव; मां के अंतिम दर्शन की इच्छा हुई पूरी परिवार का इकलौता सहारा था सुपनदीप, पिता का पहले ही हो चुका था निधन; पूरे गांव में पसरा मातम करनाल: हरियाणा के करनाल जिले के गांव शेखूपुरा मंचुरी के रहने वाले नौजवान सुपनदीप सिंह […]
Nishant Malyan
By : Updated On: 28 Jun 2026 12:42:PM
अमेरिका में जान गंवाने वाले सुपनदीप का पार्थिव शरीर पहुंचा गांव शेखूपुरा मंचुरी, नम आंखों से पूरे क्षेत्र ने दी अंतिम विदाई
ਅਮਰੀਕਾ ਤੋਂ ਕਰਨਾਲ ਦੇ ਪਿੰਡ ਸ਼ੇਖੂਪੁਰਾ ਮੰਚੁਰੀ ਵਿੱਚ ਪਹੁੰਚੀ ਨੌਜਵਾਨ ਸੁਪਨਦੀਪ ਸਿੰਘ ਦੀ ਮ੍ਰਿਤਕ ਦੇਹ, ਪਿੰਡ ਵਾਸੀਆਂ ਨੇ ਦਿੱਤੀ ਅੰਤਿਮ ਵਿਦਾਈ।

प्रवासी भारतीयों और सामाजिक संगठनों के सहयोग से कैलिफोर्निया से लाया गया शव; मां के अंतिम दर्शन की इच्छा हुई पूरी

परिवार का इकलौता सहारा था सुपनदीप, पिता का पहले ही हो चुका था निधन; पूरे गांव में पसरा मातम

करनाल:

हरियाणा के करनाल जिले के गांव शेखूपुरा मंचुरी के रहने वाले नौजवान सुपनदीप सिंह का पार्थिव शरीर अमेरिका के कैलिफोर्निया से बुधवार को उनके पैतृक गांव पहुंच गया। जैसे ही सुपनदीप का शव गांव की सीमा में दाखिल हुआ, वैसे ही पूरे क्षेत्र में मातम पसर गया। अपने जिगर के टुकड़े को आखिरी बार देखने के बाद परिवार के सब्र का बांध टूट गया और रो-रोकर बुरा हाल हो गया। मृतक के अंतिम दर्शन के लिए उमड़े जनसैलाब की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे।

प्रवासी भारतीयों और सामाजिक संगठनों के सहयोग से वतन लौटा लाल

सुपनदीप सिंह की कुछ दिन पहले अमेरिका के कैलिफोर्निया में अचानक मौत हो गई थी। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार के लिए शव को भारत लाना एक बड़ी चुनौती बना हुआ था। दुख की इस घड़ी में परिवार, ग्रामीणों, सामाजिक संगठनों और अमेरिका में रह रहे प्रवासी भारतीय (NRI) भाईचारे के लोगों ने मिलकर प्रयास किए। सभी के सामूहिक सहयोग और आर्थिक मदद की बदौलत ही सुपनदीप का पार्थिव शरीर भारत लाया जा सका, जिससे बुजुर्ग मां और बहनों को अपने बेटे का अंतिम दीदार नसीब हो सका।

परिवार का इकलौता कमाऊ बेटा था सुपनदीप

ग्रामीणों ने बेहद दुखी मन से बताया कि सुपनदीप अपने परिवार का एकमात्र सहारा था। उसके पिता का पहले ही देहांत हो चुका था, जिसके बाद मां और बहनों की पूरी जिम्मेदारी सुपनदीप के कंधों पर ही थी। 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह सुनहरे भविष्य और घर के आर्थिक हालात सुधारने की उम्मीद लेकर पहले कनाडा गया था और बाद में अमेरिका पहुंचा था। परिवार को आस थी कि वह विदेश में मेहनत कर घर की गरीबी दूर करेगा, लेकिन अचानक आई उसकी मौत की खबर ने पूरे परिवार को अंदर से तोड़कर रख दिया।

मां की आखिरी इच्छा हुई पूरी, पूरे सम्मान के साथ हुआ अंतिम संस्कार

बेटे की मौत के बाद बुजुर्ग मां की सिर्फ एक ही इच्छा थी कि उसे अपने बेटे का चेहरा आखिरी बार देखने को मिल जाए ताकि वह उसे अंतिम विदाई दे सके। पार्थिव शरीर गांव पहुंचने से मां की यह आखिरी इच्छा तो पूरी हो गई, लेकिन जवान बेटे की लाश देखकर मां का विलाप सुन हर किसी का कलेजा कांप उठा।

सुपनदीप के अंतिम दर्शन के लिए गांव और आसपास के इलाकों से भारी संख्या में लोग पहुंचे। ग्रामीणों ने नम आंखों से उसे भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और अंतिम यात्रा में शामिल होकर पीड़ित परिवार का ढांढस बंधाया। धार्मिक रीति-रिवाजों के अनुसार पैतृक गांव के श्मशान घाट में पूरे सम्मान के साथ उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया है।

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