1320 मेगावाट बिजली खरीद में बदली गईं 86 में से 84 शर्तें, सरकार दे जवाब: कुमारी सैलजा
चंडीगढ़, 18 सितंबर ; सिरसा की सांसद, पूर्व केंद्रीय मंत्री, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की महासचिव एवं सीडब्ल्यूसी सदस्य तथा उत्तराखंड कांग्रेस की प्रभारी कुमारी सैलजा ने उत्तराखंड की भाजपा सरकार से 1320 मेगावाट बिजली खरीद प्रक्रिया पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सरकार को बताना होगा कि पहले यूजेवीएनएल और टीएचडीसी के संयुक्त उपक्रम का प्रस्ताव क्यों रद्द किया गया और उसके बाद बिजली खरीद से संबंधित टेंडर की 86 में से 84 शर्तों में बदलाव किसके हित में किया गया।
कुमारी सैलजा ने कहा कि यह कोई सामान्य प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि उत्तराखंड के हितों और सरकारी खजाने से जुड़ा अत्यंत गंभीर मामला है। आरोप है कि टेंडर की लगभग पूरी नियमावली बदलकर ऐसी व्यवस्था बनाई गई, जिसमें 1320 मेगावाट बिजली की पूरी आपूर्ति एक ही बोलीदाता से ली जा सके। इसके साथ ही बिजली संयंत्र का उत्तराखंड में स्थापित होना भी अनिवार्य नहीं रखा गया तथा बिजली की शिफ्टिंग और पारेषण से जुड़ा अतिरिक्त वित्तीय बोझ भी उत्तराखंड के उपभोक्ताओं पर पड़ने की आशंका है। उन्होंने कहा कि इसके बाद अडानी पावर से 1320 मेगावाट बिजली की खरीद के लिए 25 वर्षों की दीर्घकालिक व्यवस्था को मंजूरी दी गई। यह बिजली 5.746 रुपए प्रति यूनिट की दर से खरीदे जाने की बात सामने आई है। पूरे अनुबंध की अवधि में इस बिजली खरीद का अनुमानित वित्तीय आकार करीब 1.66 लाख करोड़ रुपए बताया जा रहा है। इतने बड़े और लंबे वित्तीय दायित्व में उत्तराखंड को बांधने से पहले सरकार को टेंडर प्रक्रिया, शर्तों में किए गए बदलावों और उपभोक्ताओं पर पडऩे वाले वास्तविक बोझ की पूरी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए थी।
कुमारी सैलजा ने सवाल किया कि यूजेवीएनएल-टीएचडीसी के प्रस्ताव को समाप्त करने की आवश्यकता क्यों पड़ी? टेंडर की 86 में से 84 शर्तें किन अधिकारियों और विशेषज्ञों की सिफारिश पर बदली गईं? पूरे 1320 मेगावाट की आपूर्ति एक ही बोलीदाता से लेने की शर्त क्यों रखी गई? उत्तराखंड के बाहर स्थापित संयंत्र से बिजली खरीदने का रास्ता किसके लिए खोला गया और राज्य के सार्वजनिक उपक्रमों को इस महत्वपूर्ण परियोजना से बाहर क्यों किया गया?
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की जनता का पैसा खर्च हो, आर्थिक बोझ प्रदेश के उपभोक्ता उठाएं और लाभ किसी निजी कंपनी को मिले ऐसी व्यवस्था स्वीकार नहीं की जा सकती। सरकार केवल यह कहकर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती कि संबंधित कंपनी सबसे कम दर वाली बोलीदाता थी। जब टेंडर की मूल शर्तों में व्यापक बदलाव किए गए हों, तब पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता, प्रतिस्पर्धा और निष्पक्षता पर उठ रहे सवालों का जवाब देना सरकार का दायित्व है।
कुमारी सैलजा ने मांग की कि उत्तराखंड सरकार टेंडर की मूल और संशोधित शर्तें, यूजेवीएनएल-टीएचडीसी के प्रस्ताव को रद्द करने से संबंधित फाइलें, वित्तीय आकलन, बिजली दर की गणना और प्रस्तावित समझौते के सभी दस्तावेज सार्वजनिक करे। उन्होंने कहा कि इस पूरे प्रकरण की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड किसी कॉरपोरेट घराने की जागीर नहीं है। 1.66 लाख करोड़ रुपए के इस मामले में एक-एक दस्तावेज और एक-एक रुपये का हिसाब प्रदेश की जनता के सामने देना ही पड़ेगा।
