25 साल पहले लगाया पीपल पेड़ कटा देख कर फूट-फूटकर रो पड़ीं 90 वर्षीय देवला बाई, बोली- ”पीपल नहीं ये तो मेरा बेटा था”
Chattisgarh में एक बुजुर्ग महिला का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है जिसमें वह 25 साल पहले लगाये गए पीपल के पेड़ को अवैध रूप से काट दिए जाने पर रोती हुई नजर आ रही हैं।
90-year-old Devla Bai Cry on Tree Cut: प्रकृति हमारे लिए कितना जरुरी है और उसका हमारे जीवन में क्या महत्व ये हम सभी जानते हैं। लेकिन लालच और विकास के चक्कर में हम उसी जीवन देने वाली प्रकृति का गला घोंट रहे हैं। खैरागढ़ की रहने वाली 90 साल की देवला बाई ने सालों पहले एक पीपल का पेड़ अपने घर के पास लगाया था।
90 साल की देवला बाई हर दिन उस पीपल के पेड़ की पूजा करती। देवला बाई कहती हैं कि वो पीपल के पेड़ को पेड़ नहीं बल्कि अपना बेटा मानती थी। जिस तरह से लोग अपने बच्चे का ख्याल रखते हैं उसी तरह से वो पीपल के पेड़ का ख्याल रखती।
देवला बाई कहती हैं कि वो पिछले 20 सालों से ज्यादा वक्त से इस पेड़ की देखभाल बेटे की तरह करती आ रहीं थी। इसी बीच चोरी छुपे किसी ने उस पीपल के पेड़ को रात के अंधेरे में काट दिया। बुजुर्ग देवला को जैसे ही इस बात का पता चला वो भागती हुई पेड़ के पास पहुंची।
वहां का नजारा देखते ही उसकी आंखों से आंसू बहने लगे। वो चीख चीखकर कहने लगी कि उसके बेटे को किसी ने उससे छीन लिया है। लोगों ने बुजुर्ग महिला को काफी समझाने की कोशिश की लेकिन वो घंटों कटे पेड़ से लिपटकर रोती रही। बुजुर्ग महिला कभी कटे पेड़ के तने को देखकर उसे दुलारती तो कभी जोर जोर से रोने लगती। ऐसा लगा जैसे बुजुर्ग मां का बेटा ही उससे छिन गया हो।
केंद्रीय मंत्री किरेन रीजीजू ने हैशटैग ‘एक पेड़ मां के नाम’ के साथ वीडियो ‘एक्स’ पर साझा करते हुए लिखा, ‘‘यह बहुत ही हृदय विदारक दृश्य है। एक बुजुर्ग महिला उस पीपल के पेड़ को काट दिए जाने पर फूट-फूट कर रो रही है जिसे उसने 20 साल पहले लगाया था। मुझे बताया गया है कि यह छत्तीसगढ़ राज्य में हुआ है।’’
पुलिस अधिकारी ने बताया कि ग्रामीण प्रमोद पटेल द्वारा छह अक्टूबर को दर्ज करायी गई शिकायत के आधार पर इमरान मेमन और प्रकाश कोसरे को इस कृत्य के लिए गिरफ्तार किया गया है। मेमन ने हाल ही में बगल की कृषि भूमि खरीदी थी और कथित तौर पर वह पेड़ हटाना चाहता था ताकि उसकी सड़क तक पहुंच हो सके।
अधिकारी ने बताया कि उसने पांच अक्टूबर को कोसरे की मदद से पेड़ काटने की कोशिश की, लेकिन ग्रामीणों के कड़े विरोध के कारण ऐसा नहीं कर सका। अधिकारी ने बताया कि इसके बाद दोनों ने कथित तौर पर रात में पेड़ काट दिया। आरोपियों ने जिस कटर मशीन का इस्तेमाल किया था, उसे पास की नदी में फेंक दिया और उसे निकालने के लिए गोताखोरों को लगाया गया है।
आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 298 (किसी भी वर्ग के धर्म का अपमान करने के इरादे से पूजा स्थल को नुकसान पहुंचाना या अपवित्र करना) और 238 (अपराध के सबूतों को गायब करना, या अपराधी को छिपाने के लिए झूठी जानकारी देना) के अलावा सार्वजनिक संपत्ति क्षति निवारण अधिनियम के तहत एक मामला दर्ज किया गया है।
अधिकारी ने बताया कि दोनों आरोपियों को एक स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।