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Ambala: बाढ़ से बचाने की जंग हाईकोर्ट तक पहुंची, 230 पेड़ों पर अटका करोड़ों का औद्योगिक भविष्य

अंबाला। मानसून की दस्तक से पहले अंबाला कैंट के HSIIDC इंडस्ट्रियल एस्टेट में चिंता का माहौल है। एक तरफ बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है, तो दूसरी तरफ 230 यूकेलिप्टस (सफेदा) के पेड़ सुरक्षा दीवार के निर्माण में बाधा बने हुए हैं। अब यह मामला सीधे पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट पहुंच गया है, जहां 17 […]
Jaspreet Singh
By : Updated On: 15 Jun 2026 15:55:PM
Ambala: बाढ़ से बचाने की जंग हाईकोर्ट तक पहुंची, 230 पेड़ों पर अटका करोड़ों का औद्योगिक भविष्य

अंबाला। मानसून की दस्तक से पहले अंबाला कैंट के HSIIDC इंडस्ट्रियल एस्टेट में चिंता का माहौल है। एक तरफ बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है, तो दूसरी तरफ 230 यूकेलिप्टस (सफेदा) के पेड़ सुरक्षा दीवार के निर्माण में बाधा बने हुए हैं। अब यह मामला सीधे पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट पहुंच गया है, जहां 17 जून को अहम सुनवाई होगी।

हरियाणा चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इंडस्ट्रियल एस्टेट के चारों ओर RCC रिटेनिंग वॉल (सुरक्षा दीवार) बनाने के लिए 230 पेड़ काटने की अनुमति मांगी है। बताया जा रहा है कि इनमें से करीब 70 पेड़ पूरी तरह सूख चुके हैं।

पिछले साल की बाढ़ ने दिया था बड़ा झटका

उद्यमियों का कहना है कि पिछले वर्ष भारी बारिश और बाढ़ के कारण कई फैक्ट्रियों में पानी भर गया था, जिससे करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ। उनका दावा है कि यदि इस बार मानसून से पहले सुरक्षा दीवार नहीं बनी तो पूरा औद्योगिक क्षेत्र फिर से जलमग्न हो सकता है।

हाईकोर्ट की रोक बनी सबसे बड़ी बाधा

दरअसल, 1 अप्रैल 2026 को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश शील नागू की पीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पूरे हरियाणा में पेड़ों की कटाई पर अंतरिम रोक लगा दी थी। कोर्ट ने यह फैसला राज्य में बेहद कम वन क्षेत्र और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए लिया था।

इसी आदेश के चलते अंबाला इंडस्ट्रियल एस्टेट की सुरक्षा दीवार का काम फिलहाल रुका हुआ है।

उद्योगपतियों ने कोर्ट में रखी दलील

हरियाणा चैंबर ऑफ कॉमर्स की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता रुपिंदर एस. खोसला और अधिवक्ता सर्वेश मलिक ने अदालत को बताया कि वे पर्यावरण संरक्षण के पक्षधर हैं, लेकिन पूर्ण प्रतिबंध के कारण व्यावहारिक समस्याएं पैदा हो रही हैं।

याचिका में कहा गया है कि यदि जल्द निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ तो ड्रेनेज सिस्टम ओवरफ्लो होने से पूरा औद्योगिक क्षेत्र पानी में डूब सकता है, जिससे हजारों लोगों की रोजी-रोटी प्रभावित होगी।

क्या मिलेगी राहत?

गौरतलब है कि इसी जनहित याचिका में हाईकोर्ट पहले बहादुरगढ़ के मुंगेशपुर ड्रेन के पास 149 पेड़ काटने की शर्तिया अनुमति दे चुका है। इसके बदले प्रशासन को 1490 नए पौधे लगाने का आदेश दिया गया था।

अब सभी की नजरें 17 जून की सुनवाई पर टिकी हैं। देखना होगा कि हाईकोर्ट अंबाला के उद्योगपतियों को राहत देता है या पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए रोक बरकरार रखता है।

बड़ा सवाल

क्या बाढ़ से उद्योगों को बचाने के लिए पेड़ों की कटाई जरूरी है, या पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए?

17 जून को आने वाला फैसला अंबाला के औद्योगिक क्षेत्र और हजारों परिवारों के भविष्य पर बड़ा असर डाल सकता है।

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