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कंबोडिया साइबर स्कैम का पर्दाफाश, पाकिस्तानी एजेंट का ऑफर- “10 लड़के भेजो

बिना ऑफर लेटर और बिना कंपनी के सिर्फ टेलीग्राम पर इंटरव्यू और पासपोर्ट के जरिए हो रही थी भर्ती अमेरिका और अन्य देशों के नागरिकों को ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर ठगने के लिए युवाओं का इस्तेमाल, 55 दिन की अंडरकवर पड़ताल में हुआ बड़ा खुलासा नई दिल्ली/कंबोडिया: कंबोडिया में बैठकर दुनिया भर के लोगों को ठगने […]
Nishant Malyan
By : Updated On: 09 Jul 2026 08:51:AM
कंबोडिया साइबर स्कैम का पर्दाफाश, पाकिस्तानी एजेंट का ऑफर- “10 लड़के भेजो
कंबोडिया और मलेशिया से संचालित हो रहे अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी सिंडिकेट के जाल में फंस रहे हैं भारतीय युवा। (सांकेतिक चित्र)

बिना ऑफर लेटर और बिना कंपनी के सिर्फ टेलीग्राम पर इंटरव्यू और पासपोर्ट के जरिए हो रही थी भर्ती

अमेरिका और अन्य देशों के नागरिकों को ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर ठगने के लिए युवाओं का इस्तेमाल, 55 दिन की अंडरकवर पड़ताल में हुआ बड़ा खुलासा

नई दिल्ली/कंबोडिया:

कंबोडिया में बैठकर दुनिया भर के लोगों को ठगने वाले साइबर स्कैम सिंडिकेट का एक बहुत बड़ा और खौफनाक नेटवर्क सामने आया है। एक मीडिया रिपोर्टर ने 55 दिनों तक ‘अंडरकवर एजेंट’ बनकर इस सिंडिकेट के भीतर पैठ बनाई और भारत से सीधे तौर पर युवाओं को ठगी के जाल में धकेलने वाले इस पूरे अंतरराष्ट्रीय रैकेट का भंडाफोड़ किया है।

टेलीग्राम और पासपोर्ट पर सीधी भर्ती, शर्त सिर्फ ‘अंग्रेजी’

इस सिंडिकेट में एंट्री के लिए किसी लीगल प्रोसेस की जरूरत नहीं थी। न तो किसी कंपनी का कोई नाम था, न कोई आधिकारिक वेबसाइट और न ही कोई जॉइनिंग या ऑफर लेटर। भर्ती की पूरी प्रक्रिया सिर्फ दो चीजों पर टिकी थी— टेलीग्राम (Telegram) पर इंटरव्यू और उम्मीदवार का पासपोर्ट

जांच के दौरान कंबोडिया में बैठे एक पाकिस्तानी एजेंट ने रिपोर्टर (जो खुद एजेंट बनकर बात कर रहा था) को सीधे तौर पर लालच देते हुए कहा:

“तुम मुझे बस 10 लड़के भेज दो… हर लड़के को भेजने पर तुम्हें 1000 डॉलर (यानी करीब 95 हजार रुपये) का मोटा कमीशन मिलेगा।”

इस भर्ती के लिए सिंडिकेट की शर्त बेहद आसान थी— लड़कों को अंग्रेजी बोलना आना चाहिए। एजेंट का कहना था कि कंबोडिया पहुंचने के बाद बाकी की सारी ट्रेनिंग कंपनी खुद देगी कि लोगों को कैसे ठगना है।

विदेशी नागरिकों को ‘डिजिटल अरेस्ट’ करने की साजिश

इस 55 दिन लंबी जांच के दौरान रिपोर्टर ने पाकिस्तान के शातिर एजेंटों, कंपनी के एचआर (HR), ट्रेनिंग देने वाले स्टाफ और कंबोडिया व मलेशिया में बैठकर इस पूरे काले कारोबार को संभालने वाले सरगनाओं तक अपनी पहुंच बनाई। उनका भरोसा जीतकर यह बात साफ हुई कि भारत से जिन युवाओं को अंग्रेजी बोलने के नाम पर वहां बुलाया जा रहा है, उन्हें ‘डिजिटल अरेस्ट’ (Digital Arrest) और अन्य साइबर फ्रॉड के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। इन युवाओं का मुख्य काम अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों के अमीर नागरिकों को झांसे में लेकर उनसे करोड़ों रुपये की साइबर ठगी करना था।

अगला बड़ा खुलासा कल: भारतीय युवाओं को इस तरह के फर्जी झांसों में फंसाकर जब कंबोडिया ले जाया जाता है, तो वहां उनके साथ क्या सलूक होता है, उन्हें किन हालातों में बंधक बनाकर काम कराया जाता है और इस सिंडिकेट का असली चेहरा क्या है— इस बेहद खौफनाक कड़वे सच का पूरा वीडियो और ग्राउंड रिपोर्ट कल यानी 10 जुलाई, 2026 को सामने आएगी।

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