16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेने दिल्ली पहुचीं जापानी PM
पदभार ग्रहण करने के बाद जापानी पीएम ताकाइची की यह पहली भारत यात्रा; PM मोदी के साथ करेंगी शिखर स्तरीय वार्ता
सेमीकंडक्टर, आर्थिक सुरक्षा, एआई (AI) और समुद्री सहयोग पर रहेगा मुख्य फोकस; दोनों देशों के बीच कई अहम समझौतों की उम्मीद
नई दिल्ली (02 जुलाई, 2026):
जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची बुधवार शाम को तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली पहुंचीं। वह यहाँ आयोजित होने वाले 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेंगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर 1 से 3 जुलाई तक होने वाली यह यात्रा, पदभार ग्रहण करने के बाद पीएम ताकाइची की पहली आधिकारिक भारत यात्रा है। हवाई अड्डे पर उनके आगमन पर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया पर जापानी प्रधानमंत्री का स्वागत करते हुए कहा कि यह यात्रा भारत और जापान के बीच विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी को एक नई ऊंचाई पर ले जाने की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है।
द्विपक्षीय वार्ता के तीन मुख्य बिंदु
टोक्यो से रवाना होने से पहले एक अनौपचारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री ताकाइची ने भारत के बढ़ते रणनीतिक महत्व पर जोर दिया था। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्थिति में बढ़ती अन Uncertainty (अनिश्चितता) के बीच, भारत जैसे बुनियादी मूल्यों और रणनीतिक हितों को साझा करने वाले देश के साथ सहयोग और भी आवश्यक हो गया है। उन्होंने साफ किया कि पीएम मोदी के साथ उनकी चर्चा मुख्य रूप से तीन बिंदुओं पर केंद्रित होगी:
- जापान और भारत के बीच रणनीतिक सहकारी संबंधों को और गहरा करना।
- आर्थिक सुरक्षा और लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं (Resilient Supply Chains) में सहयोग बढ़ाना।
- निवेश, सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिज और नवाचार (Innovation) की दिशा में दोनों देशों की निजी कंपनियों के बीच साझेदारी को बढ़ावा देना।
भारत-जापान आर्थिक मंच में जुटेंगे 150 से अधिक दिग्गज
पीएम ताकाइची ने द्विपक्षीय संबंधों के विस्तार में निजी क्षेत्र की भूमिका पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इस यात्रा के दौरान ‘जापान-भारत आर्थिक मंच’ (India-Japan Business Forum) का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें जापान के व्यापारिक समुदाय के 150 से अधिक शीर्ष प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। इसके अलावा, दोनों देश बंगाल की खाड़ी को भारत के पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ने वाली एक “औद्योगिक मूल्य श्रृंखला” (Industrial Value Chain) विकसित करने पर भी विचार कर रहे हैं।
‘इंडो-पैसिफिक’ और ‘क्वाड’ सुरक्षा पर होगी चर्चा
जापानी प्रधानमंत्री ने कहा कि एशिया के दो प्रमुख लोकतांत्रिक देश होने के नाते भारत और जापान हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए जिम्मेदार हैं। वह पीएम मोदी के साथ ‘स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत’ (FOIP) को साकार करने के प्रयासों पर दृढ़ता से चर्चा करेंगी, जिसमें जापान, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और भारत (क्वाड – Quad) का ढांचा शामिल है।
इन क्षेत्रों में हो सकते हैं बड़े समझौते
राजनयिक सूत्रों के अनुसार, इस शिखर सम्मेलन के अंत में एक संयुक्त बयान जारी किया जाएगा। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), फार्मास्यूटिकल्स, उन्नत बैटरी तकनीक, महत्वपूर्ण खनिजों, ऊर्जा स्थिरता और ओडिशा में एक बड़े पैमाने पर ‘हरित अमोनिया परियोजना’ को लेकर कई महत्वपूर्ण समझौतों (MoUs) पर हस्ताक्षर होने की पूरी उम्मीद है।
यह शिखर सम्मेलन अगस्त 2025 में प्रधानमंत्री मोदी की टोक्यो यात्रा के दौरान आयोजित 15वें शिखर सम्मेलन की गति को आगे बढ़ाएगा, जहाँ दोनों पक्षों ने आर्थिक सुरक्षा पहल और अगले 5 वर्षों में 5 लाख कुशल भारतीय पेशेवरों को जापान में अवसर देने की कार्ययोजना पर सहमति जताई थी।