HomeNewsतरक्की और परंपरा का तालमेल ही मजबूत समाज की नींव: बैतूल में बोलीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू
तरक्की और परंपरा का तालमेल ही मजबूत समाज की नींव: बैतूल में बोलीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू
संबोधन के मुख्य अंश: एक नए नजरिए से राष्ट्रपति के आगमन पर बैतूल में क्या रहा खास? गतिविधि मुख्य आकर्षण और संदेश पर्यावरण संदेश मंच पर जाने से पहले राष्ट्रपति ने औषधीय गुणों वाले रुद्राक्ष का पौधा रोपा। पारंपरिक स्वागत गोंडी जनजातीय कड़पड़ा दल के कलाकारों ने लोक नृत्य पेश कर स्वागत किया। समारोह का […]
मुख्य विचार: “वास्तविक सशक्तीकरण सिर्फ आर्थिक तरक्की से नहीं आता, बल्कि यह तब झलकता है जब इंसान के भीतर आत्मविश्वास, आत्मसम्मान और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना जागती है।” — राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू
संबोधन के मुख्य अंश: एक नए नजरिए से
प्रकृति और संस्कृति का अटूट रिश्ता: राष्ट्रपति ने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में जनजातीय समाज की जीवनशैली पूरी दुनिया के लिए एक गाइड की तरह है। यह समाज सदियों से धरती, जल, वायु और सूर्य-चंद्रमा को पूजता आया है। उन्हें पूजा करने के लिए किसी खास मंदिर की जरूरत नहीं होती, क्योंकि वे पूरी प्रकृति को ही भगवान मानते हैं।
2047 का विकसित भारत: भारत को साल 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने का जो सपना देखा गया है, वह तब तक अधूरा है जब तक देश का हर वर्ग तरक्की की मुख्यधारा में शामिल नहीं हो जाता। हिमालय से लेकर कन्याकुमारी तक भारत की सांस्कृतिक और प्राकृतिक धरोहर को सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है।
भ्रम से बचाने में अध्यात्म का रोल: राष्ट्रपति ने चिंता जताई कि समय-समय पर जनजातीय समाज को गुमराह करने की कोशिशें की जाती हैं। ऐसे में ब्रह्माकुमारी संस्थान द्वारा आयोजित यह आध्यात्मिक सम्मेलन इस समाज में जागरूकता और नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देने में बहुत मददगार साबित होगा।
बीमारियों से मुक्ति के प्रयास: मध्यप्रदेश सरकार की तारीफ करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि जनजातीय इलाकों में ‘सिकल सेल एनीमिया’ जैसी बीमारी से निपटने के लिए बड़े स्तर पर प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं, जिससे समाज का स्वास्थ्य स्तर सुधरेगा।
डिजिटल सशक्तिकरण की जरूरत: बदलते वक्त के साथ जनजातीय युवाओं को आधुनिक शिक्षा, हुनर और डिजिटल तकनीक से जोड़ना बेहद जरूरी है, बशर्ते उनकी मूल पहचान और सांस्कृतिक विरासत पर कोई आंच न आए।
प्राकृतिक खेती की ओर वापसी: केमिकल वाले खाद और कीटनाशकों के बढ़ते इस्तेमाल पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती ही भारत की असली पहचान है, जो भूमि की उपजाऊ शक्ति को बचाती है और इंसानी मन-मस्तिष्क को सकारात्मक रखती है।
राष्ट्रपति के आगमन पर बैतूल में क्या रहा खास?
गतिविधि
मुख्य आकर्षण और संदेश
पर्यावरण संदेश
मंच पर जाने से पहले राष्ट्रपति ने औषधीय गुणों वाले रुद्राक्ष का पौधा रोपा।
पारंपरिक स्वागत
गोंडी जनजातीय कड़पड़ा दल के कलाकारों ने लोक नृत्य पेश कर स्वागत किया।
समारोह का आयोजन
ब्रह्माकुमारी संस्थान द्वारा ‘एम्पावरमेंट ऑफ ट्राइबल सोसाइटी बाय स्पिरिचुअल अवेकनिंग’ कार्यक्रम आयोजित किया गया।
वीआईपी अगवानी
मध्यप्रदेश के पांच दिवसीय दौरे के पहले दिन इंदौर एयरपोर्ट पर सीएम डॉ. मोहन यादव ने राष्ट्रपति का स्वागत किया।
प्रदर्शनी का मुआयना: आत्मनिर्भरता की झलक
राष्ट्रपति मुर्मू ने कार्यक्रम स्थल पर लगाई गई विशेष प्रदर्शनियों और स्टॉल्स को बहुत करीब से देखा और महिलाओं के काम की सराहना की:
श्री अन्न (मिलेट्स) के उत्पाद: ‘सतपुडांचल प्रोड्यूसर कंपनी’ से जुड़ी करीब 2075 स्वयं सहायता समूह की महिलाएं रागी, कोदो, कुटकी और बाजरा से पास्ता, कुकीज, नूडल्स और इडली जैसी चीजें बनाकर हर महीने 8 से 10 हजार रुपये की अतिरिक्त कमाई कर रही हैं। राष्ट्रपति ने यहां मिलेट्स से बने 18 तरह के पौष्टिक व्यंजनों को देखा।
भरेवा शिल्प कला: स्टॉल पर जनजातीय महिलाओं द्वारा पीतल, तांबे और कांसे से बनाई गई खूबसूरत धातु कलाकृतियों का प्रदर्शन किया गया था।
वोकल फॉर लोकल: वन आधारित उत्पादों जैसे नांदा फॉरेस्ट हनी (शहद), बैतूल सागौन और कुकरु कॉफी के स्टॉल के जरिए स्थानीय आजीविका की ताकत को दिखाया गया।