हरियाणा के शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों को सरकारी खर्च पर दिखाया जाएगा शहीद स्मारक: अनिल विज
सितंबर, 1857 में अंबाला छावनी में 5वीं और 60वीं नेटिव इन्फैंट्री के सैनिकों को परेड ग्राउंड में महज 10 मिनट के भीतर 135 सैनिक मारे गए : विज
चंडीगढ़, 29 अक्टूबर – हरियाणा के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने कहा कि आगामी 5 नवंबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह अंबाला छावनी में निर्मित ‘‘आजादी की पहली लड़ाई के शहीद स्मारक-1857’’ का लोकार्पण करेंगे। इसके बाद अंबाला छावनी के गांधी ग्राउंड में एक जनसभा आयोजित की जाएगी। इसके अलावा, उन्होंने बताया कि हरियाणा के सभी शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों को सरकारी खर्च पर शहीद स्मारक दिखाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि “आजादी की लड़ाई में जिसने भी एक कदम आगे बढ़ाया, मैं उसके चरण स्पर्श करता हूं। हमारा उद्देश्य उन सभी वीरों को सम्मान देना है, जिन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया और जिनके योगदान को उचित पहचान नहीं मिल पाई।” वहीं, विज ने दावा किया कि 1857 की क्रांति के बाद सितंबर, 1857 में अंबाला छावनी में 5वीं और 60वीं नेटिव इन्फैंट्री के सैनिकों को परेड ग्राउंड में महज 10 मिनट के भीतर 135 सैनिक मारे गए, 33 को बंदी बना लिया गया और लगभग 40 सैनिक भागने में सफल रहे।
विज आज यहां अंबाला छावनी के पीडब्ल्यूडी रेस्ट हाउस में मीडियाकर्मियों के साथ बातचीत कर रहे थे। उन्होंने कहा कि ‘‘आजादी की पहली लड़ाई के शहीद स्मारक-1857’’ ऐतिहासिक स्मारक के संबंध में कुछ महत्वपूर्ण तथ्य साझा करना जरूरी है। विशेष रूप से दो सवालों का जवाब जानना आवश्यक है कि यह स्मारक अंबाला छावनी में ही क्यों बनाया गया है और 1857 की क्रांति को आजादी की पहली लड़ाई क्यों कहा जाता है।
मेरठ से नौ घंटे पहले अंबाला छावनी में शुरू हुई थी 1857 की क्रांति- विज
विज ने कहा कि अंबाला छावनी में शहीद स्मारक बनाने का प्रमुख आधार कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के पूर्व प्रमुख डॉ. के.सी. यादव द्वारा अपने शोध और पुस्तक में प्रस्तुत तथ्य हैं। उनके शोध के अनुसार, 1857 की क्रांति, जिसे अंग्रेजों ने ‘म्यूटिनी’ यानी सैनिक विद्रोह कहा था, मेरठ से लगभग नौ घंटे पहले अंबाला छावनी में शुरू हो गई थी।
उन्होंने कहा कि इस विषय पर उन्होंने स्वयं भी गहन शोध किया है और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जुटाए हैं। उनके अनुसार, 10 मई, 1857 को अंबाला छावनी की 5वीं और 60वीं नेटिव इन्फैंट्री के सैनिक मेरठ से लगभग नौ घंटे पहले सुबह हथियार लेकर अपनी बैरकों से बाहर आ गए थे। ये तथ्य इस बात की ओर संकेत करते हैं कि 1857 के विद्रोह के इतिहास में अंबाला छावनी की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है।
राष्ट्रीय अभिलेखागार के दस्तावेज में दर्ज है अंबाला में 135 सैनिकों की मौत का उल्लेख- विज
ऊर्जा मंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय अभिलेखागार से उन्हें एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दस्तावेज मिला है, जिसकी प्रति भी उपलब्ध कराई जाएगी। इस दस्तावेज के अनुसार, सितंबर 1857 के दौरान अंबाला छावनी में 5वीं और 60वीं नेटिव इन्फैंट्री के सैनिकों को परेड ग्राउंड में बुलाया गया था। इसी दौरान कथित तौर पर किसी सैनिक ने ‘फ्लाई’ यानी भागने का नारा लगाया, जिसके बाद यूरोपीय सैनिकों ने उन पर गोलियां चला दीं।
विज ने दावा किया कि इस घटना में महज 10 मिनट के भीतर 135 सैनिक मारे गए, 33 को बंदी बना लिया गया और लगभग 40 सैनिक भागने में सफल रहे। उन्होंने कहा कि दस्तावेज में दर्ज इस घटना का विवरण आज तक व्यापक रूप से लोगों के सामने नहीं आया। उनके अनुसार, यह घटना 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास का एक महत्वपूर्ण और उपेक्षित अध्याय है।
1857 के विद्रोह के बाद बंगाल आर्मी की अधिकांश भारतीय रेजिमेंटें भंग कर दी गईं- विज
विज ने कहा कि 1857 की क्रांति को आजादी की पहली लड़ाई कहने का एक महत्वपूर्ण आधार यह भी है कि इसके बाद अंग्रेजों ने अपनी बंगाल आर्मी की अधिकांश भारतीय रेजिमेंटों को भंग कर दिया था। उन्होंने बताया कि इस संबंध में भी ऐतिहासिक दस्तावेज उपलब्ध हैं, जिनकी प्रतियां साझा की जाएंगी।
उन्होंने अंग्रेजी दस्तावेज का हवाला देते हुए कहा कि 1857 के विद्रोह के बाद बंगाल आर्मी की 74 नियमित नेटिव इन्फैंट्री रेजिमेंटों में से 54 को भंग कर दिया गया था। विज के अनुसार, इन रेजिमेंटों में से केवल तीन को वफादार माना गया, जबकि बड़ी संख्या में भारतीय सैनिकों ने अंग्रेजों के विरुद्ध विद्रोह किया था।
उन्होंने कहा कि अंबाला छावनी में तैनात 5वीं और 60वीं नेटिव इन्फैंट्री तथा चौथी कैवेलरी को भी बाद में भंग कर दिया गया था। विज ने दावा किया कि संबंधित सरकारी दस्तावेजों में इन सैन्य इकाइयों के आगे ‘म्यूटिनस’ यानी विद्रोही होने का उल्लेख मिलता है। उन्होंने 1923-24 के सरकारी गजेटियर का भी हवाला दिया और कहा कि इन दस्तावेजों से अंबाला छावनी में हुए विद्रोह की ऐतिहासिक भूमिका को समझने में मदद मिलती है।
22 एकड़ में फैला एशिया का सबसे बड़ा शहीद स्मारक, 1857 की क्रांति के दृश्य तकनीक से किए गए जीवंत- विज
विज ने बताया कि लगभग 22 एकड़ में फैला यह स्मारक एशिया का सबसे बड़ा शहीद स्मारक है और 1857 की क्रांति को समर्पित देश का पहला स्मारक है। उन्होंने कहा कि स्मारक के भीतर अंबाला छावनी से शुरू होकर देश के विभिन्न हिस्सों में लड़ी गई लड़ाई के प्रमुख घटनाक्रमों को पुनर्निर्मित कर प्रदर्शित किया गया है।
उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक संघर्ष को नई पीढ़ी तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए आधुनिक तकनीक और विभिन्न दृश्य माध्यमों का इस्तेमाल किया गया है। स्मारक में कुल 22 गैलरियां बनाई गई हैं, जिनमें 1857 की क्रांति, क्रांतिकारियों के संघर्ष और उनके बलिदान से जुड़े विभिन्न पहलुओं को प्रदर्शित किया जाएगा।
1857 के अनसुने क्रांतिकारियों को मिलेगा सम्मान, लगभग 700 शहीदों के नाम सुनहरे अक्षरों में लिखे जाएंगे- विज
ऊर्जा मंत्री ने कहा कि देश के इतिहास में एक बड़ी विडंबना यह रही है कि स्वतंत्रता संग्राम के अनेक क्रांतिकारियों और शहीदों को वह पहचान नहीं मिली, जिसके वे हकदार थे। उन्होंने कहा कि उन्होंने बचपन में भी मुख्य रूप से यही पढ़ा था कि आजादी की लड़ाई कांग्रेस ने लड़ी, जबकि कांग्रेस की स्थापना 1885 में हुई थी और ए.ओ. ह्यूम ने इस जमात का गठन किया था। उससे 28 वर्ष पहले 1857 में देशव्यापी सशस्त्र विद्रोह हुआ था।
विज ने कहा कि 1857 की क्रांति में अंग्रेजों के खिलाफ हथियार उठाने वाले अनेक वीरों को फांसी दी गई और कई क्रांतिकारियों को पेड़ों से बांधकर गोलियां मारी गईं। अंबाला में भी काली पलटन के निकट एक ऐसे स्थान का उल्लेख मिलता है, जहां क्रांतिकारियों को पेड़ों से बांधकर गोली मारने की घटना से जुड़ी जानकारी सामने आती है। उन्होंने कहा कि इन वीरों के बलिदान को लंबे समय तक वह सम्मान नहीं मिला, जिसके वे अधिकारी थे। इसी कमी को दूर करने के लिए स्मारक में एक विशेष गैलरी बनाई गई है, जो उन ‘अनसंग हीरोज’ यानी गुमनाम नायकों को समर्पित होगी, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।
विज ने बताया कि देश के प्रमुख इतिहासकारों की एक समिति गठित की गई थी और उनके सहयोग से व्यापक शोध किया गया। इस प्रक्रिया में लगभग 700 शहीदों के नाम संकलित किए गए हैं, जिन्हें स्मारक में सुनहरे अक्षरों में अंकित किया जाएगा। प्रत्येक क्रांतिकारी का नाम, पिता का नाम और गांव का नाम भी दर्ज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि स्मारक के उद्घाटन के बाद यदि शोध या सामाजिक स्तर पर प्रमाणों के आधार पर अन्य शहीदों के नाम सामने आते हैं, तो उन्हें भी इसमें शामिल किया जाएगा।
गुमनाम शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए बनाई गई है विशेष गैलरी, दर्ज होगा श्रद्धांजलि देने वालों का नाम
विज ने बताया कि स्मारक में गुमनाम क्रांतिकारियों को श्रद्धांजलि देने के लिए एक विशेष गैलरी बनाई गई है। इसमें एक समय में लगभग 40 लोग एक साथ खड़े होकर शहीदों को श्रद्धांजलि दे सकेंगे। उन्होंने कहा कि श्रद्धांजलि देने की इस प्रक्रिया को विशेष तकनीक से जोड़ा गया है, जिसके तहत श्रद्धांजलि अर्पित करने पर एक ज्योति प्रज्वलित होगी, जो आकाश की ओर उठती दिखाई देगी। इसके साथ ही श्रद्धांजलि देने वाले व्यक्ति का नाम भी रिकॉर्ड में दर्ज किया जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ियां यह जान सकें कि उनके पूर्वजों यानी दादा-नाना इत्यादि ने भी इन गुमनाम शहीदों को सम्मान और श्रद्धांजलि अर्पित की थी।
ऊर्जा मंत्री ने कहा कि यह स्मारक उन ऐतिहासिक भूलों को सुधारने का प्रयास है, जिनके कारण देश के अनेक बलिदानियों को उचित सम्मान नहीं मिल पाया। उन्होंने कहा कि 1857 की क्रांति के इन अनसुने नायकों को इतिहास में उनका उचित स्थान दिलाना और उनके बलिदान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना ही इस शहीद स्मारक का मूल उद्देश्य है।
ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने 1857 की क्रांति में कमल के फूल और रोटी की ऐतिहासिक भूमिका बताई, शहीद स्मारक के महत्व पर डाला प्रकाश
मंत्री अनिल विज ने कहा कि 1857 की क्रांति के इतिहास को समझने के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि 10 मई को रविवार था। उस समय अंग्रेज अधिकारी रविवार को चर्च जाया करते थे। क्रांतिकारियों ने इसी परिस्थिति का लाभ उठाकर अंग्रेजों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की योजना बनाई थी। इससे पहले, 26 मार्च से ही उन सरकारी बंगलों और कोठियों में आग लगाने की घटनाएं शुरू हो गई थीं, जिन्हें क्रांतिकारी अपनी योजना में बाधा मानते थे। उन्होंने कहा कि अंबाला छावनी में आग लगाई गई कोठियों का पूरा विवरण, तारीखों और पतों सहित, सरकारी रिकॉर्ड तथा गजट में दर्ज है और इसके दस्तावेज भी उपलब्ध हैं।
विज ने कहा कि शहीद स्मारक में 63 मीटर ऊंचा कमल का फूल बनाया गया है, जिसमें दो हाई-स्पीड लिफ्ट लगाई गई हैं। यहां स्काई कैफे, फूड कोर्ट और सॉफ्टवेयर से संबंधित दुकानें खोलने की भी योजना है। स्मारक परिसर में हेलीपैड भी बनाया गया है, ताकि विदेशों से आने वाले विशिष्ट अतिथियों और वीवीआईपी को यहां लाया जा सके। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार विदेशी मेहमानों को देश के अन्य ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण कराया जाता है, उसी प्रकार अंबाला के इस शहीद स्मारक को भी दिखाया जा सकेगा।
कमल के फूल को लेकर उठाए जाने वाले सवालों पर विज ने कहा कि 1857 की क्रांति में कमल का फूल और रोटी दोनों महत्वपूर्ण संदेशवाहक थे। क्रांतिकारी एक सैन्य टुकड़ी से दूसरी टुकड़ी तक कमल का फूल और रोटी भेजकर आपसी संपर्क स्थापित करते थे। जिस टुकड़ी तक ये प्रतीक पहुंचते थे, उसे क्रांति में शामिल होने की सहमति के रूप में देखा जाता था। उन्होंने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया अत्यंत गोपनीय तरीके से चलाई जाती थी, ताकि अंग्रेजों को क्रांतिकारियों की योजनाओं की भनक तक न लगे।
विज ने कहा कि एक बार किसी व्यक्ति ने सवाल उठाया था कि उन्होंने शहीद स्मारक में कमल का फूल क्यों बनवाया, जबकि यह उनकी पार्टी का चुनाव चिह्न भी है। इस पर उन्होंने जवाब दिया था कि पहले इतिहास पढ़ना चाहिए। इतिहास में कमल के फूल और रोटी के माध्यम से क्रांतिकारियों के बीच संदेश पहुंचाने का उल्लेख मिलता है। इसलिए स्मारक में कमल के फूल का निर्माण केवल एक प्रतीकात्मक संरचना नहीं, बल्कि 1857 की क्रांति से जुड़ी ऐतिहासिक परंपरा को दर्शाने का प्रयास है।
हरियाणा के सभी कॉलेजों के विद्यार्थियों को सरकारी खर्च पर शहीद स्मारक दिखाया जाएगा- विज
ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने बताया कि हरियाणा सरकार ने प्रदेश के सभी विद्यार्थियों को शहीद स्मारक का भ्रमण कराने का निर्णय लिया है और इस संबंध में आदेश भी जारी किए जा चुके हैं। इसके तहत कॉलेजों, पॉलिटेक्निक संस्थानों, इंजीनियरिंग कॉलेजों और मेडिकल कॉलेजों तथा अन्य शिक्षण संस्थानों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को सरकारी खर्च पर स्मारक दिखाया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रतिदिन लगभग 50 बसों को यहां लाने की योजना है। इसके अतिरिक्त, स्कूलों के बच्चों को भी स्मारक का भ्रमण कराया जाएगा, ताकि नई पीढ़ी देश के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को सही ढंग से समझ सके।
विज ने कहा कि शहीद स्मारक का निर्माण उन सभी स्वतंत्रता सेनानियों और क्रांतिकारियों को श्रद्धांजलि देने के उद्देश्य से किया गया है, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना योगदान दिया। उन्होंने कहा, “आजादी की लड़ाई में जिसने भी एक कदम आगे बढ़ाया, मैं उसके चरण स्पर्श करता हूं। हमारा उद्देश्य उन सभी वीरों को सम्मान देना है, जिन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष किया और जिनके योगदान को उचित पहचान नहीं मिल पाई।”
उन्होंने कहा कि 1857 की क्रांति में सैनिकों ने अपने प्राणों और रक्त का बलिदान देकर स्वतंत्रता की जो ज्वाला प्रज्वलित की थी, वही आगे चलकर देश की आजादी के आंदोलन की प्रेरणा बनी। शहीद स्मारक का उद्देश्य इसी ऐतिहासिक विरासत को संजोना और आने वाली पीढ़ियों तक स्वतंत्रता संग्राम के वास्तविक इतिहास तथा बलिदान की गाथाओं को पहुंचाना है।